कोटा में दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षक हित, संगठन विस्तार और राष्ट्र निर्माण पर हुआ मंथन

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 19 सितंबर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), जिला कोटा के तत्वावधान में जिला अध्यक्ष रासबिहारी यादव के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में शिक्षक हितों, संगठनात्मक विस्तार, शैक्षिक गुणवत्ता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सामाजिक समरसता, शिक्षक समस्याओं तथा संगठन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

जिला मंत्री सत्येंद्र चौहान ने बताया कि सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए जिला एवं खंड स्तर के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यकर्ताओं ने संगठन को अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने तथा शिक्षा एवं समाज के क्षेत्र में संगठन की भूमिका को मजबूत करने को लेकर अपने विचार रखे।

द्वितीय सत्र में प्रांत संयोजक कुटुंब प्रबोधन रामविलास ने संत रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के संदर्भ में उनके जीवन, भक्ति, विचार एवं सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कभी भी व्यक्ति की प्रगति में स्थायी अवरोध नहीं बन सकतीं। संत रविदास जी का जीवन कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष, भक्ति और कर्म के माध्यम से समाज को दिशा देने का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने संत रविदास जी के जीवन से सामाजिक समरसता, समानता और सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

प्रदेश संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने तृतीय सत्र में संगठनात्मक ढांचे एवं संगठन के विस्तार पर चर्चा की। उन्होंने ‘प्रभावी प्रार्थना सभा’ और ‘हमारा विद्यालय, हमारा तीर्थ’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक को विद्यालय को मंदिर, बालक को भगवान और स्वयं को उसका पुजारी मानकर कार्य करना चाहिए। इसी भाव से नई पीढ़ी को वैचारिक एवं चारित्रिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अनेक प्रकार की सूचनाओं, विचारों एवं सामाजिक प्रभावों से गुजर रही है। ऐसे समय में उसे वैचारिक भ्रम और भटकाव से बचाकर संस्कार, राष्ट्रभावना, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि की दिशा देना आवश्यक है। प्रभावी प्रार्थना सभा इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

चतुर्थ सत्र खुली शैक्षिक चर्चा के रूप में आयोजित किया गया। इसमें शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को कैडर एवं स्तर के अनुसार संकलित किया गया। खंड स्तर, जिला स्तर और प्रदेश स्तर की समस्याओं को अलग-अलग संकलित कर संबंधित स्तर पर समाधान के लिए प्रयास करने पर चर्चा हुई। प्रदेश स्तर की समस्याओं को राज्य संगठन के समक्ष भेजने की बात भी कही गई।

द्वितीय दिवस पंचम सत्र में जिला टोली की बैठक आयोजित की गई। इसमें संपूर्ण जिला कार्यकारिणी, खंड कार्यकारिणी तथा जिले के 177 संकुलों के संयोजक एवं सहसंयोजक सहित विभिन्न कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। बैठक में संगठन द्वारा आयोजित पौधारोपण एवं गुरु वंदन कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी नवंबर माह में संत रविदास जयंती के कार्यक्रमों की तैयारियों के संबंध में सभी खंडों की ओर से कार्य-वृत्त प्रस्तुत किया गया।

षष्ठम सत्र की अध्यक्षता प्रदेश सह संगठन मंत्री गिरिजा सुमन ने की। मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह मंत्री युधिष्ठिर सिंह तथा मुख्य अतिथि अखिल भारतीय सह सचिव महिला एबीआरएसएम सुषमा बिश्नोई रहीं।

मुख्य वक्ता युधिष्ठिर सिंह ने हनुमान जी की अष्ट सिद्धियों के संदर्भ में उनके गुणों और आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व से संबंधित अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन के प्रति पूर्ण समर्पण, ऊर्जा और अनुशासन के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को हनुमान जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर संगठन के कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए। बालकों में राष्ट्रीय भावना एवं राष्ट्र चेतना के विकास के लिए शिक्षक और कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुख्य अतिथि सुषमा बिश्नोई ने मातृशक्ति की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बालकों में संस्कारों का बीजारोपण कर उनमें राष्ट्रभावना का प्रकटीकरण करना आवश्यक है। युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक भाव विकसित करने की आवश्यकता है।

अध्यक्षता कर रहीं गिरिजा सुमन ने कहा कि शिक्षक हित एवं राष्ट्र निर्माण संगठन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं। संगठन की शक्ति उसके समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ताओं में निहित है। शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए शिक्षक हितों के साथ शिक्षा एवं समाज के व्यापक हितों के लिए भी संगठन को निरंतर सक्रिय रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं पर गंभीरता से मंथन कर उन्हें एकीकृत रूप में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के संगठन के समक्ष रखा जाना चाहिए, ताकि उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकें। उन्होंने अनुशासन, आपसी सहयोग एवं सकारात्मक सोच को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए रचनात्मक एवं सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है।

जिला अध्यक्ष रासबिहारी यादव ने कहा कि संगठन द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षिक एवं सामाजिक आयामों को प्रभावी रूप से प्रत्येक विद्यालय तक पहुंचाना आवश्यक है। संगठन के विचार तभी सार्थक होंगे, जब वे विद्यालय स्तर पर व्यवहार और गतिविधियों के रूप में दिखाई दें। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा कार्यकर्ताओं के बीच आपसी संवाद एवं सहयोग के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

सम्मेलन में संयुक्त निदेशक आशा मंडावत, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कोटा अनिल पोरवाल, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी माध्यमिक रामचरण मीणा, अतिरिक्त परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा नवल महावर, अतिरिक्त जिला अधिकारी माध्यमिक रूपनारायण मालव, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी आदित्य विजय, सहायक निदेशक रूपेश सिंह, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुल्तानपुर प्रतिभा त्रिपाठी, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सांगोद, सुल्तानपुर एवं कोटा शहर राजेंद्र शर्मा, एसबीओ धनराज नागर, आनंद स्वरूप बड़ोलिया, एसबीओ सुल्तानपुर राधेश्याम वर्मा, एसबीओ लाडपुरा कृष्णकांत शर्मा तथा एपीसी अंजू जागीरवाल सहित शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों एवं पदाधिकारियों की सहभागिता रही।

सम्मेलन में जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्य, विभिन्न खंड एवं ब्लॉक के अध्यक्ष एवं मंत्री तथा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यकर्ताओं ने शिक्षक समस्याओं, संगठनात्मक विस्तार, शैक्षिक नवाचार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सामाजिक समरसता एवं विद्यालय आधारित विभिन्न आयामों को लेकर विचार रखे।

सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन की रीति-नीति एवं विचारों को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने, शिक्षक हितों के लिए संगठित रूप से कार्य करने तथा शिक्षा एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया।

प्रथम दिवस कार्यक्रम के संयोजक रमेश चंद्र गौतम तथा द्वितीय दिवस के सहसंयोजक गिरिराज प्रसाद नगर ने सभी आगंतुकों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर जिला संगठन की ओर से जिलेभर से पधारे सभी पदाधिकारियों, जिला कार्यकारिणी सदस्यों, खंड एवं ब्लॉक अध्यक्षों-मंत्रियों तथा समस्त कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि सभी की सक्रिय सहभागिता, सहयोग एवं संगठन के प्रति समर्पण से दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण बना।

Pramukh Samvad

ताजा खबरों को देखने के लिए प्रमुख संवाद से जुड़े

https://www.pramukhsamvad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!