Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 08 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कोटा महानगर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में “मातृशक्ति प्रमुख जन गोष्ठी” का आयोजन तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम में मातृशक्ति की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सांस्कृतिक संरक्षण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पेसिफिक यूनिवर्सिटी, उदयपुर के कुलगुरु एवं अखिल भारतीय स्वदेशी जागरण संयोजक प्रो. भगवती प्रसाद ने मातृशक्ति को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि इतिहास साक्षी है—माँ ही महान व्यक्तित्वों के निर्माण की प्रेरणा रही है। उन्होंने जीजाबाई, अहिल्याबाई होल्कर एवं अन्य महान मातृशक्तियों के उदाहरण देते हुए कहा कि संस्कारवान समाज की नींव माताएं ही रखती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु श्रीमती विमला ने की। उन्होंने मातृशक्ति को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। मोबाइल और नकारात्मक प्रभावों से दूर रखते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा देना माताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने परिवार संस्था को भारतीय संस्कृति की मूल इकाई बताते हुए कहा कि पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण ही समाज और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से सावधान रहने और संयुक्त परिवार प्रणाली को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
स्वदेशी के महत्व पर जोर देते हुए कहा गया कि देश में निर्मित वस्तुओं का अधिकाधिक उपयोग कर “मेड इन इंडिया” को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना साकार हो सके।
मातृभाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर बल देते हुए वक्ताओं ने कहा कि माताएं नई पीढ़ी को भाषा, संस्कार, भजन, और भारतीय परंपराओं से जोड़ें। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में मातृशक्ति से आह्वान किया गया कि वे संवाद, लेखन, ब्लॉग, एवं डिजिटल माध्यमों के जरिए समाज में सकारात्मक संदेश फैलाएं और परिवार व्यवस्था को सशक्त बनाएं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटा महानगर संघचालक गोपाल लाल गर्ग सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।
