Writtan by: प्रमुख संवाद
बारां, 3 जुलाई।
राजस्थान के बारां जिले के शाहाबाद क्षेत्र में एक अनोखा विवाह इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्य प्रदेश के युवक सागर राजपूत और बारां जिले के देवरी गांव निवासी किन्नर सोनू उर्फ रेशमा ने हिंदू रीति-रिवाज से मंदिर में सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को वैवाहिक बंधन में बांध दिया। यह विवाह प्रेम, समानता और सामाजिक स्वीकार्यता का संदेश देने वाला माना जा रहा है।
एक साल का साथ बना जीवनभर का रिश्ता
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के गुना जिले के कोलीपुरा निवासी सागर राजपूत और शाहाबाद उपखंड के देवरी गांव निवासी किन्नर सोनू उर्फ रेशमा पिछले करीब एक वर्ष से एक-दूसरे के संपर्क में थे। समय के साथ दोनों के बीच विश्वास और अपनापन बढ़ा, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गया। इसके बाद दोनों ने जीवनभर साथ रहने का निर्णय लिया।
सामाजिक सोच से ऊपर उठकर लिया बड़ा फैसला
बताया जा रहा है कि सागर ने रेशमा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में रेशमा समाज की प्रतिक्रिया और लोगों की सोच को लेकर असमंजस में थीं, लेकिन सागर के विश्वास और साथ ने उन्हें यह कदम उठाने का साहस दिया। आखिरकार दोनों ने सामाजिक पूर्वाग्रहों की परवाह किए बिना विवाह करने का फैसला किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लिए सात फेरे
शाहाबाद कस्बे के एक मंदिर में पंडित लखन लाल शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया। अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। इस दौरान रेशमा के परिजन और करीबी मित्र मौजूद रहे, जिन्होंने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देकर उनके सुखद दांपत्य जीवन की कामना की।
समानता और सम्मान का दिया संदेश
विवाह के बाद रेशमा ने कहा कि सागर ने उनसे विवाह कर समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि किन्नर समुदाय भी सम्मान, समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार रखता है। यह विवाह प्रेम, विश्वास और सामाजिक समानता का संदेश देता है तथा लोगों को भेदभाव से ऊपर उठकर इंसानियत और रिश्तों का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
