31 जुलाई की डेडलाइन पर पंचायत-निकाय चुनाव अटके, आयोग के 6 रिमाइंडर के बाद भी आरक्षण प्रक्रिया अधूरी

Written by : Sanjay kumar

जयपुर, 3 जुलाई।

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां प्रशासनिक पत्राचार में उलझी हुई हैं। एक ओर हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार के बावजूद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि राज्य निर्वाचन आयोग सरकार को अब तक छह बार रिमाइंडर भेज चुका है, लेकिन ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण लंबित होने से चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हो पा रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने शुरू की कार्रवाई

22 मई 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जून को पंचायतीराज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र भेजकर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया, ताकि चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सके।

आरक्षण तय होने के बाद ही संभव हैं चुनाव

निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि राजस्थान पंचायतीराज निर्वाचन नियम, 1994 तथा नगरीय स्वशासन निर्वाचन नियम, 1994 के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग के लिए आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। समय पर जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने 15 जून को दोनों विभागों को स्मरण पत्र भी भेजे।

सरकार ने ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का दिया हवाला

16 जून को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने आयोग को जवाब देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। विभाग के अनुसार राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन किया जा चुका है, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आरक्षण निर्धारण की कार्रवाई पूरी की जा सकेगी।

निर्वाचन आयोग ने सरकार को याद दिलाई जिम्मेदारी

सरकार के जवाब के बाद 23 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने फिर पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि ट्रिपल टेस्ट के लिए गठित आयोग राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए उसकी रिपोर्ट समय पर प्राप्त करना और उसके आधार पर आरक्षण तय करना सरकार की जिम्मेदारी है। आयोग ने कहा कि आरक्षण निर्धारण की सूचना मिलते ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

निकाय चुनावों में भी वही स्थिति

नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी लगभग यही स्थिति बनी हुई है। निर्वाचन आयोग ने 1 जून को स्वायत्त शासन विभाग को पहला पत्र भेजा और 15 जून को स्मरण पत्र जारी किया। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग ने ओबीसी आयोग से ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि आरक्षण निर्धारण कर निर्वाचन आयोग को सूचना भेजी जा सके।

RTI से सामने आया पूरा पत्राचार

29 जून को सूचना के अधिकार के तहत निर्वाचन आयोग, पंचायतीराज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और ओबीसी आयोग के बीच हुए पत्राचार का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक हुआ। इससे स्पष्ट हुआ कि हाईकोर्ट की समय-सीमा नजदीक आने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आरक्षण निर्धारण और ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट के इंतजार में अटकी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार निर्धारित समय के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर पाती है या नहीं, ताकि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर कराए जा सकें।

Pramukh Samvad

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