Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली, 15 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली के लाल किले से देश को संबोधित किया। यह प्रधानमंत्री के तौर पर उनका लगातार 13वां संबोधन था, जिसमें उन्होंने देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं के सपनों को साकार करने का संकल्प दोहराया। अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विशेष रूप से स्मरण किया। भाषण के समापन पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले जैसे महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उन्हीं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और ऐतिहासिक संदर्भ
इस स्वतंत्रता दिवस के विशेष मौके पर प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद यह वह विशिष्ट समय है, जब लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी है। जब देशवासी ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, तो राष्ट्र के लिए इससे बेहतर और गौरवशाली अवसर और क्या हो सकता है। इस दौरान उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक चेतना को एक नई ऊर्जा के साथ जोड़ने का प्रयास किया।
12 वर्षों का कार्यकाल और आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को जनता के सामने रखा और देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों तथा मध्यम वर्ग के परिवारों के विशेष योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कोरोना काल के भयंकर संकट और हालिया युद्धों के कारण वैश्विक स्तर पर उपजे एनर्जी संकट का उल्लेख करते हुए अपनी सरकार की दूरदर्शी नीतियों की जमकर सराहना की। भारत की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल उद्योग, रक्षा, रेलवे, कनेक्टिविटी, फार्मा उद्योग से लेकर स्टार्टअप्स तक के क्षेत्रों में हासिल की गई अभूतपूर्व सफलताओं को विस्तार से गिनाया।
‘शक्ति की सप्तधारा’ और विकसित भारत 2047 का विजन
वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत की इस नई धारा के तहत देश को हर मोर्चे पर आगे बढ़ाना होगा और युवा शक्ति के सामर्थ्य को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना होगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ छोटे-छोटे पुर्जे और बड़ी मशीनरी दोनों का देश में ही निर्माण करना होगा। उन्होंने डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक वैश्विक बाजार का भरोसा जीतने की बात कही।
वैश्विक मानदंड, ज़ीरो डिफ़ेक्ट और क्वालिटी का मंत्र
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक मानदंडों पर हर हाल में खरा उतरना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘ज़ीरो डिफ़ेक्ट’ हमारी पहचान बननी चाहिए और देश के हर निर्माता को यह संदेश दिया कि दुनिया के बाजार में हमारा एकमात्र मंत्र ‘क्वालिटी से कोई समझौता नहीं’ होना चाहिए। उन्होंने रिफॉर्म्स के बारे में बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार किसी मजबूरी के तहत नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास यानी कनविक्शन के साथ किए जा रहे हैं, जो देश को निरंतर प्रगति के पथ पर ले जा रहे हैं।
कृषि, फूड प्रोसेसिंग और केमिकल-फ्री खेती पर बल
कृषि क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और मजबूत करनी होगी क्योंकि अब दुनिया के बाजार खुल चुके हैं। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि उन्हें खेत से लेकर सीधे वैश्विक बाजार तक अपनी पहुंच बनानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से केमिकल-फ्री खेती को पूरी ताकत से अपनाने की अपील की, जिससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि देशवासियों को स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा।
स्टार्टअप्स, नारी शक्ति और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण
युवाओं और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में आज ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं और युवाओं के सपनों को पंख देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का विशेष फंड रखा गया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से लाल किले की प्राचीर से यह प्रार्थना की कि वे महिलाओं के सम्मान में आगे आएं और विधानसभाओं तथा संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिलाने में अपना पूरा योगदान दें।
दिमागी नक्सलवाद की चुनौती और भविष्य की राह
देश की आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि भौतिक रूप से नक्सलवाद का लगभग खात्मा हो चुका है, किंतु आज भी ‘दिमागी नक्सलवाद’ देश के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसका मुकाबला हमें वैचारिक स्तर पर पूरी दृढ़ता से करना होगा। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

