Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली: 13 अगस्त।
देश में तेजी से बढ़ती मेडिकल महंगाई और निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों से आम जनता को राहत दिलाने के लिए भारत सरकार और बीमा नियामक (IRDAI) ने स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े और क्रांतिकारी सुधारों की तैयारी कर ली है। एशिया में भारत की मेडिकल महंगाई सबसे अधिक (12% से 14% सालाना) दर्ज की गई है, जिसके चलते मध्यम और गरीब परिवारों की जीवनभर की कमाई इलाज में साफ हो जाती है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना बनाई है।
प्रमुख बदलाव और हाइलाइट्स:
- सरकारी बनाम निजी खर्चों का भारी अंतर: हालिया संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जहां सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने का औसत खर्च महज 70 डॉलर (लगभग ₹6,680) है, वहीं निजी अस्पतालों में यह खर्च बढ़कर 530 डॉलर (लगभग ₹50,580) तक पहुंच जाता है। इसी खाई को पाटने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं।
- ‘कॉमन हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट’: अलग-अलग बीमा कंपनियों की उलझाऊ शर्तों और दरों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार एक ‘कॉमन प्लान’ अनिवार्य करने जा रही है। इसके तहत सभी कंपनियों के पास विभिन्न बीमारियों और इलाजों के लिए बीमा की सीमा, दरें और प्रक्रियाओं की सूची बिल्कुल एक समान होगी, जिसे समझना बेहद आसान होगा।
- अस्पतालों की मनमानी पर लगाम (तय दरें): सरकार बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच इलाज की दरें पहले से तय करने पर विचार कर रही है। इससे अस्पताल मरीजों से मनमाना शुल्क नहीं वसूल पाएंगे और लगभग 10% से 15% तक होने वाले फर्जी या गैर-जरूरी दावों पर लगाम लगेगी।
- ‘नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज’ से तुरंत छुटकारा: अस्पताल से छुट्टी (डिसचार्ज) के समय घंटों बिल पास होने के इंतजार से राहत देने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच ब्रिज का काम करेगा, जिससे क्लेम का निपटारा पलक झपकते ही हो जाएगा।
भविष्य की रूपरेखा और रोडमैप
भारत की 1.4 अरब की आबादी में बीमा पर खर्च अभी जीडीपी के 4% से भी कम है, जो वैश्विक औसत (7%) से काफी पीछे है। इस विशाल 130 बिलियन डॉलर के बीमा बाजार को सुदृढ़ करने के लिए आईआरडीएआई (IRDAI) प्रमुख की अध्यक्षता में एक विशेष हाई-लेवल पैनल का गठन किया गया है। इस पैनल में अस्पतालों, उद्योगपतियों और सीआईआई (CII) के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो इस साल के अंत तक अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपेंगे।
इन सुधारों के लागू होने से न केवल हेल्थ इंश्योरेंस सस्ता और सुलभ होगा, बल्कि देश के हर नागरिक को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
