राजस्थान में निकाय चुनाव की तैयारियां तेज, सितंबर में दो चरणों में मतदान की संभावना, आचार संहिता जल्दी लगेगी!

Written by : Sanjay kumar

अंतिम मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं की समीक्षा में जुटा राज्य निर्वाचन आयोग

जयपुर, 19 अगस्त। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा से पहले संबंधित अधिकारियों और टीमों द्वारा अंतिम तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार सितंबर 2026 के पहले और दूसरे सप्ताह में अलग-अलग चरणों में मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मतदान की वास्तविक तारीखों और चरणवार निकायों की सूची का अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

पहले चरण में कुछ निकायों में मतदान की संभावना

संभावित कार्यक्रम के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में नगरीय निकायों के एक हिस्से के लिए मतदान कराया जा सकता है। इसके बाद दूसरे सप्ताह में शेष निकायों में मतदान की प्रक्रिया पूरी कराने की संभावना है। चुनाव कार्यक्रम का निर्धारण संबंधित निकायों की प्रशासनिक तैयारियों, मतदाता सूचियों और मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

अंतिम मतदाता सूची और बूथ व्यवस्थाओं की जांच

चुनाव की घोषणा से पहले राज्य निर्वाचन आयोग की टीम अंतिम मतदाता सूची, मतदान केंद्रों तथा वहां उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा कर रही है। इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक इंतजामों का भी मिलान किया जा रहा है। आयोग का प्रयास है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद मतदान प्रक्रिया के संचालन में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा सामने न आए।

चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही लागू होगी आदर्श आचार संहिता

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित नगरीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने के साथ ही उन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी। इसके बाद सरकार, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के लिए निर्वाचन संबंधी निर्धारित नियम लागू होंगे।

नए विकास कार्यों और घोषणाओं पर लग सकती है रोक

आचार संहिता प्रभावी होने के बाद संबंधित चुनाव क्षेत्रों में नए विकास कार्यों के शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण जैसे कार्यक्रमों पर प्रतिबंध रहेगा। नई विकास योजनाओं की घोषणा, नए कार्यों के लिए प्रक्रिया शुरू करने तथा नए कार्यादेश जारी करने पर भी निर्वाचन नियमों के अनुसार रोक लागू रहेगी।

मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों अथवा राजनीतिक पदाधिकारियों द्वारा ऐसी नई घोषणाएं करने की अनुमति नहीं होगी, जिनसे चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किए जाने की स्थिति पैदा हो।

पहले से स्वीकृत और जारी कार्यों पर नहीं पड़ेगा सामान्य प्रभाव

आचार संहिता लागू होने से पहले जिन विकास कार्यों के कार्यादेश जारी हो चुके हैं और जिनकी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार शुरू हो चुकी है, उनके संबंध में निर्वाचन नियमों के अनुरूप कार्य जारी रखने की अनुमति हो सकती है। इसी प्रकार पहले से चल रहे निर्माण कार्यों को केवल आचार संहिता लागू होने के कारण सामान्य रूप से बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, ऐसे सभी कार्यों पर निर्वाचन नियमों और संबंधित सक्षम अधिकारियों के निर्देश लागू रहेंगे।

आवश्यक जनसेवाएं रहेंगी जारी

आचार संहिता का उद्देश्य आम नागरिकों को आवश्यक सेवाओं से वंचित करना नहीं है। इसलिए पेयजल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव प्रक्रिया के कारण आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने को लेकर भी चर्चा

निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य विधानसभा में प्रस्तावित विधेयकों को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा बनी हुई है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही और विधायी प्रक्रिया पर आदर्श आचार संहिता के प्रभाव को लेकर स्थिति संबंधित संवैधानिक और निर्वाचन नियमों के अनुसार तय होगी।

विधायी कार्य और चुनावी प्रचार में अंतर

आचार संहिता लागू होने के दौरान विधानसभा की संवैधानिक एवं विधायी कार्यवाही अपने निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो सकती है। हालांकि, सरकार या जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐसे निर्णय, घोषणाएं अथवा प्रचार गतिविधियां नहीं की जा सकतीं जिनका उद्देश्य चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करना माना जाए। सरकारी उपलब्धियों के प्रचार, विज्ञापनों और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर भी निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।

सरकारी विज्ञापनों पर भी रहेगी निर्वाचन नियमों की नजर

चुनाव की घोषणा के बाद सरकारी विज्ञापनों और प्रचार सामग्री को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी। ऐसी सामग्री के माध्यम से किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या सरकार की उपलब्धियों का चुनावी लाभ के लिए प्रचार किए जाने पर निर्वाचन नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। संबंधित विभागों को आयोग के निर्देशों के अनुरूप ही प्रचार एवं विज्ञापन संबंधी गतिविधियां संचालित करनी होंगी।

आधिकारिक घोषणा के बाद ही तस्वीर होगी पूरी तरह साफ

फिलहाल सितंबर में संभावित दो चरणों में मतदान को लेकर तैयारियों की चर्चा है, लेकिन इसे अंतिम चुनाव कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना में ही मतदान की तारीख, चरणवार नगरीय निकायों, नामांकन प्रक्रिया, मतदान और मतगणना से संबंधित कार्यक्रम की अंतिम जानकारी सामने आएगी।

चुनाव की घोषणा का इंतजार

राज्य में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की नजर अब राज्य निर्वाचन आयोग की औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई है। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित नगरीय निकायों में निर्वाचन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी और उसी के साथ आदर्श आचार संहिता भी प्रभावी हो जाएगी। फिलहाल आयोग की ओर से अंतिम स्तर की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।

Pramukh Samvad

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