Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 23 अगस्त। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समस्त पंजाबी खत्री सभा रजिस्टर्ड, कोटा की ओर से सेवा और सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल पेश की गई। सभा के पदाधिकारियों ने एक अभावग्रस्त कच्ची बस्ती में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों और बच्चों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं। इस दौरान पन्नियां बीनकर परिवार का पालन-पोषण करने वाली मातृशक्ति को भी राखी, लड्डू, फल, कुमकुम और चावल भेंट किए गए।
आर्थिक अभाव के कारण कोई बच्चा पर्व की खुशियों से वंचित न रहे
सभा के प्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रवीण गुलाटी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों तक रक्षाबंधन की खुशियां पहुंचाना था, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण त्योहार को उत्साहपूर्वक नहीं मना पाते। जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए राखियां, दो-दो लड्डू, कुमकुम, चावल और केले वितरित किए गए।
पदाधिकारियों ने बढ़ाया सहायता का हाथ
कार्यक्रम में संभागीय अध्यक्ष वीर वाधवा, जिला अध्यक्ष नीरज विज, सचिव हिमांशु अरोड़ा, सभा के सलाहकार रामचंद्र मलिक एवं महेंद्र निझावन सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने जरूरतमंद परिवारों की परिस्थितियों को समझते हुए उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं और बच्चों को स्नेह एवं अपनत्व का अहसास कराया।
मातृशक्ति और बच्चों की रही विशेष सहभागिता
सेवा कार्य में सभा की मातृशक्ति की ओर से श्रीमती लीला मलिक, यशोदा निझावन, मधु पंजाबी, राज छाबड़ा और मानसा का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर छोटी बेटी अनिष्का और छोटा बेटा राजवीर भी मौजूद रहे। सभी ने बच्चों के बीच उत्साहपूर्वक सामग्री का वितरण किया और उनके साथ रक्षाबंधन की खुशियां मनाईं।
रक्षाबंधन सेवा और संवेदना का भी पर्व
प्रवीण गुलाटी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि समाज में आपसी सहयोग, स्नेह और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। समाज के सक्षम लोगों को चाहिए कि वे जरूरतमंद परिवारों के साथ त्योहारों की खुशियां साझा करें, जिससे आर्थिक अभाव किसी बच्चे की मुस्कान और किसी बहन के रक्षाबंधन के उत्साह को कम न कर सके।
“खुशियां बांटें, खुशियां बढ़ाएं” का दिया संदेश
समस्त पंजाबी खत्री सभा ने इस सेवा कार्य के माध्यम से समाज को “खुशियां बांटें, खुशियां बढ़ाएं” का संदेश दिया। सभा पदाधिकारियों ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग उसमें शामिल हो और जरूरतमंद परिवार भी सम्मान, स्नेह और अपनत्व के साथ पर्व मना सकें।
