फिजियोथेरेपी के नाम पर झोलाछापों का खेल बंद हो, हर थेरेपिस्ट का पंजीकरण अनिवार्य करें

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 8 सितम्बर। फिजियोथेरेपी के नाम पर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के इलाज करने वालों पर कार्रवाई और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (आईएपी) की डिस्ट्रिक्ट ब्रांच ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने राजस्थान राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद (एनसीएएचपी स्टेट काउंसिल) के गठन की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से लागू करने और डिग्रीधारक फिजियोथेरेपिस्ट के अनिवार्य पंजीकरण के लिए पोर्टल तत्काल शुरू करने की मांग की।

आईएपी के डिस्ट्रिक्ट कन्वीनर अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार शर्मा (पीटी) एवं सचिव डॉ. जसविंदर सिंह (पीटी) ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि काउंसिल के गठन और पंजीकरण व्यवस्था में देरी का फायदा अप्रशिक्षित लोग उठा रहे हैं। फिजियोथेरेपी के नाम पर बिना पर्याप्त योग्यता इलाज किए जाने से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो सकता है। वहीं, विधिवत डिग्री प्राप्त फिजियोथेरेपिस्ट भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

6 माह-1 साल के फर्जी डिप्लोमा वालों पर कार्रवाई की मांग
आईएपी पदाधिकारियों ने कहा कि पंजीकरण व्यवस्था शुरू होने से मरीजों को यह पहचानने में आसानी होगी कि कौन अधिकृत फिजियोथेरेपिस्ट है। संगठन ने छह माह या एक वर्ष के फर्जी डिप्लोमा और प्रमाण-पत्र के आधार पर क्लीनिक संचालित करने वालों के खिलाफ एनसीएएचपी एक्ट की धारा 54 एवं 56 के तहत गैर-जमानती धाराओं में दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।

फिजियोथेरेपी को पांच वर्षीय डिग्री प्रोग्राम का दर्जा
डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरर डॉ. राहिल इकबाल (पीटी) ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नवीनतम नियमों के अनुसार फिजियोथेरेपी को पांच वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के रूप में मान्यता दी गई है। इसमें चार वर्ष का अकादमिक अध्ययन और एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी क्लिनिकल इंटर्नशिप शामिल है। उन्होंने मांग की कि सरकारी और निजी क्षेत्र में फिजियोथेरेपी सेवाओं के लिए निर्धारित शैक्षणिक मानकों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

गलत थेरेपी से स्थायी दिव्यांगता का खतरा
डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि ऑटिज्म, सीपी से प्रभावित बच्चों तथा स्ट्रोक और कार्डियक जैसी गंभीर स्थितियों वाले मरीजों में गलत थेरेपी अथवा अनुचित मशीनों का इस्तेमाल गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में इससे स्थायी दिव्यांगता का खतरा भी रहता है। उन्होंने जिला स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग करते हुए कहा कि उपचार कराने से पहले मरीज और परिजन फिजियोथेरेपिस्ट की डिग्री एवं पंजीकरण की जानकारी जरूर जांचें।

सचिव डॉ. जसविंदर सिंह (पीटी) ने बताया कि आईएपी की डिस्ट्रिक ब्रांच द्वारा कोटा शहर की सीएससी पर माह में एक दिन निशुल्क सेवा देने सहित प्रशासन के साथ मेडिकल और जागरुकता प्रोग्राम में भागीदारी निभाकर निशुल्क सेवाएं देने को तत्पर हैं।

ज्ञापन एवं पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. दिनेश कुमार शर्मा (पीटी), डॉ. जसविंदर सिंह (पीटी), डॉ. राहिल इकबाल (पीटी), डॉ. दीपक कुमार यादव (पीटी), डॉ. सुभाष आर्य (पीटी), डॉ. आयुष रोहिड़ा (पीटी), डॉ. एम आफताब (पीटी), डॉ. यशवंत (पीटी), डॉ. दीपेन्द्र (पीटी) एवं डॉ. एम अमन (पीटी), डॉ. अफरोज पठान (पीटी) मौजूद रहे।

Pramukh Samvad

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