Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली में BRICS की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन, आर्थिक सहयोग से लेकर वैश्विक शांति तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली, 11 सितंबर। भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली में 11 सितंबर को BRICS Business Forum का महत्वपूर्ण आयोजन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य प्रमुख नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, सुरक्षित आपूर्ति शृंखला, समुद्री सुरक्षा और बदलती विश्व व्यवस्था को लेकर अपने विचार रखे। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को BRICS के 20 वर्षों के संस्थागत सहयोग की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
चार देशों से शुरू हुआ BRICS अब 21 देशों के व्यापक परिवार तक पहुंचा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Business Forum में कहा कि 2006 में चार देशों से शुरू हुआ यह समूह आज 21 देशों का परिवार बन चुका है। उन्होंने BRICS की बढ़ती आर्थिक और वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि समूह के देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और इनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। BRICS का वैश्विक व्यापार में हिस्सा भी 25 प्रतिशत से अधिक है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि BRICS के पूर्ण सदस्य देशों की संख्या 11 है, जबकि साझेदार देशों को मिलाकर इसका व्यापक BRICS परिवार 21 देशों तक पहुंचता है। इस विस्तार ने समूह को एशिया, अफ्रीका, यूरोप, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक व्यापक भौगोलिक पहुंच दी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में जहां वैश्विक GDP लगभग ढाई गुना बढ़ी है, वहीं BRICS देशों की संयुक्त GDP करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है। उनके अनुसार BRICS देश अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रहे, बल्कि वैश्विक इनोवेशन और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी उभर रहे हैं।
मोदी ने इनोवेशन, स्टार्टअप, MSME, कृषि, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। भारत की अध्यक्षता में BRICS के भीतर इनक्यूबेटर नेटवर्क, MSME पोर्टल और स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसे प्रयासों को आगे बढ़ाया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश—संवाद और कूटनीति से ही निकलेगा संघर्षों का समाधान
BRICS Business Forum के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संघर्षों को लेकर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि विवादों और संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने शांति प्रयासों में भारत की भूमिका और सहयोग की तत्परता भी व्यक्त की। यह संदेश ऐसे समय आया है जब यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और समुद्री परिवहन को प्रभावित किया है।
भारत ने विशेष रूप से समुद्री परिवहन की स्वतंत्रता, नाविकों की सुरक्षा और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन मुद्दों का सीधा संबंध वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से है।
पुतिन का बड़ा संदेश—रूस पूरी दुनिया के साथ सहयोग के लिए तैयार
BRICS Business Forum के लीडर्स सेशन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच BRICS की भूमिका पर जोर दिया। पुतिन का कहना था कि रूस पूरी दुनिया के साथ सहयोग के लिए तैयार है। उनके संदेश को BRICS के आर्थिक विस्तार और वैश्विक दक्षिण की बढ़ती भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुतिन और मोदी के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की परिस्थितियों पर भी विचार साझा किए। इन संघर्षों का असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
पुतिन ने मोदी को रूस आने का दिया निमंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में करीब 45 मिनट की बातचीत हुई। इसके बाद दोनों नेता एक साथ औद्योगिक प्रदर्शनी स्थल पहुंचे। बैठक के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे मोदी ने स्वीकार कर लिया।
दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत और रूस के बीच ऊर्जा और आर्थिक संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा की है।
पुतिन और मोदी ने औद्योगिक सहयोग को भी दिया महत्व
मोदी और पुतिन ने BRICS Business Forum की गतिविधियों के साथ भारत-रूस औद्योगिक सहयोग से जुड़ी प्रदर्शनी का भी दौरा किया। इसका उद्देश्य दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग, तकनीकी साझेदारी और व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देना है। रूस के लिए भारत ऊर्जा, तकनीक और औद्योगिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि भारत के लिए रूस ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग का प्रमुख भागीदार बना हुआ है।
पियूष गोयल ने व्यापार को रोजगार और समृद्धि से जोड़ने पर दिया जोर
BRICS Business Forum के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS देशों से अपनी आर्थिक ताकत को रोजगार, संपदा और लोगों की समृद्धि में बदलने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि BRICS देश दुनिया की करीब आधी मानव आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है।
गोयल ने BRICS देशों के बीच व्यापार को अधिक गहरा और मजबूत बनाने, आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने तथा एक-दूसरे के बाजारों को अधिक अवसर देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया।
जयशंकर ने बताया BRICS की 20 वर्षों की यात्रा को महत्वपूर्ण पड़ाव
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2026 BRICS के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समूह संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में BRICS का सदस्य आधार, एजेंडा और सहयोग के तंत्र में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है।
भारत की अध्यक्षता का उद्देश्य इस विकास को आगे बढ़ाना है और इसके लिए भारत ने Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्रमुख आधार बनाया है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्था पर भी नजर
BRICS की बैठकों में लंबे समय से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, सीमा-पार भुगतान व्यवस्था और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं। नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में भी इन विषयों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि BRICS के भीतर आर्थिक संरचनाओं, मुद्राओं और राष्ट्रीय हितों में काफी अंतर है। इसलिए डॉलर के विकल्प के रूप में कोई एक समान व्यवस्था तैयार करना आसान नहीं माना जाता। फिर भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान तंत्र को मजबूत करने की कोशिशें वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में BRICS की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाती हैं।
G7 बनाम BRICS की चर्चा ने बढ़ाई वैश्विक दिलचस्पी
BRICS की बढ़ती आर्थिक शक्ति के बीच G7 और BRICS की तुलना भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। पुतिन ने BRICS की बढ़ती आर्थिक भूमिका और पश्चिमी देशों की बदलती स्थिति पर जोर दिया। हालांकि BRICS और G7 की संरचना, उद्देश्य और राजनीतिक स्वरूप अलग-अलग हैं, लेकिन BRICS के विस्तार ने वैश्विक शक्ति संतुलन पर बहस को निश्चित रूप से तेज किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार BRICS की असली ताकत केवल सदस्य देशों की संख्या या संयुक्त GDP में नहीं, बल्कि इस बात में होगी कि विविध राजनीतिक और आर्थिक हित रखने वाले देश कितनी प्रभावी ढंग से साझा आर्थिक और वैश्विक एजेंडा पर सहमति बना पाते हैं।
चीन, रूस और अन्य देशों की मौजूदगी से सम्मेलन महत्वपूर्ण
नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी इसे महत्वपूर्ण वैश्विक कूटनीतिक मंच बना रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी संभावित बातचीत पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष नजर है।
BRICS में एक ओर भारत, चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियां हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और इथियोपिया जैसे देश भी इसके विस्तार का हिस्सा हैं। इन देशों के आपसी संबंधों और अलग-अलग रणनीतिक हितों के कारण BRICS का मंच कई तरह की कूटनीतिक चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ प्रस्तुत करता है।
भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता क्यों महत्वपूर्ण
भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच भारत की भूमिका को मजबूत करने का अवसर भी है। भारत एक ओर रूस और चीन के साथ BRICS में काम कर रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत कर रहा है।
ऐसे में भारत BRICS को किसी एक देश या समूह के खिलाफ गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती—विविधता के बीच एकजुटता
BRICS के विस्तार से समूह का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। भारत-चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के अलग-अलग हित BRICS के भीतर साझा राजनीतिक रुख बनाना कठिन बनाते हैं।
इसके बावजूद BRICS का महत्व इस बात में है कि दुनिया के बड़े विकासशील और उभरते देश एक ही मंच पर आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। यदि यह समूह घोषणाओं से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश, भुगतान व्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और विकास के क्षेत्रों में ठोस सहयोग स्थापित करता है, तो आने वाले वर्षों में इसकी वैश्विक भूमिका और मजबूत हो सकती है।
18वें BRICS शिखर सम्मेलन से दुनिया की निगाहें भारत पर
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारत की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक नेतृत्व की एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। 20 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुका BRICS अब चार देशों का प्रारंभिक समूह नहीं रहा, बल्कि पूर्ण सदस्यों और साझेदार देशों को मिलाकर 21 देशों का व्यापक परिवार बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी का आर्थिक सहयोग, नवाचार और शांति पर जोर तथा राष्ट्रपति पुतिन का व्यापक वैश्विक सहयोग और BRICS की बढ़ती भूमिका पर संदेश इस सम्मेलन की दिशा को स्पष्ट करते हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि नई दिल्ली सम्मेलन BRICS को केवल एक प्रभावशाली आर्थिक मंच के रूप में आगे बढ़ाता है या बदलती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में इसे और अधिक निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा भी देता है।
