Written by : Sanjay kumar
जयपुर: 15 सितंबर।
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी आम चुनावों का इंतजार कर रहे लाखों ग्रामीण मतदाताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य में 17 और 18 सितंबर 2026 को जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों के पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण लॉटरी की तारीखों को प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दिया गया है।
प्रदेशभर में वर्तमान में चल रहे शहरी निकाय चुनावों की व्यस्तता और प्रशासनिक अमले की भारी व्यस्तता के चलते पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को कार्यक्रम में संशोधन का सुझाव दिया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है।
बदलाव के प्रमुख कारण
- निकाय चुनावों का व्यस्त शेड्यूल: 17 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव के तहत अध्यक्ष (मेयर/सभापति/अध्यक्ष) पद के नामांकन पत्रों की संवीक्षा (स्क्रूटनी) का कार्य निर्धारित है। इसके साथ ही 18 सितंबर को प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाना है।
- प्रशासनिक अमले की व्यस्तता: जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार और पुलिस महकमा पूरी तरह से निकाय चुनाव की व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है। एक ही समयावधि में निकाय चुनाव और पंचायती राज लॉटरी दोनों का एक साथ संचालन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण था।
- विभाग का विशेष सुझाव: पंचायती राज विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को यह अवगत कराया गया था कि शहरी निकाय चुनावों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी निकाली जाए।
संशोधित प्रक्रिया एवं आगामी कार्यक्रम
- नई तिथियों की घोषणा: माना जा रहा है कि शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव (21-22 सितंबर) संपन्न होने के तुरंत बाद, सितंबर के अंतिम सप्ताह में पंचायती राज के लिए नई लॉटरी तिथियों का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
- 15 नवंबर की कानूनी डेडलाइन: राज्य निर्वाचन आयोग का यह स्पष्ट लक्ष्य है कि तिथियों में मामूली बदलाव के बावजूद हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी कराकर नए जनप्रतिनिधियों का गठन कर लिया जाए।
- पारदर्शी प्रक्रिया: तय शेड्यूल के अनुसार, नई तारीखों पर जिला मुख्यालयों पर पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों और दावेदारों पर प्रभाव
राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच या पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नेताओं की नजरें पूरी तरह से इस आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी, तब तक प्रत्याशी अपने स्तर पर खुलकर प्रचार अभियान शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
लॉटरी टलने से दावेदारों में थोड़ा असमंजस जरूर बढ़ा है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल कुछ दिनों की ही देरी है। निकाय चुनाव समाप्त होते ही नई आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
