Written by :प्रमुख संवाद
कोटा, 16 सितंबर। देश के भविष्य के निर्माण और अकादमिक संवाद को एक नई दिशा देने के लिए कोटा विश्वविद्यालय एक बार फिर एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और कोटा विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के तत्वावधान में आयोजित होने वाले राजस्थान भूगोल परिषद् के 52वें राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। यह प्रतिष्ठित तीन दिवसीय महाकुंभ 17 से 19 सितम्बर 2026 तक कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य केंद्रीय विषय ‘विकसित भारत 2047: विकसित भारत के लिए ब्लूप्रिंट—एक भौगोलिक दृष्टिकोण’ रखा गया है, जिसमें देश भर के लगभग 500 से अधिक प्रख्यात भूगोलवेत्ता, शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं विद्यार्थी अपनी सहभागिता दर्ज कराएंगे। सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु हाल ही में इसके आधिकारिक पोस्टर का विमोचन कुलगुरु प्रो. सारस्वत द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. जे.पी. शर्मा, बी.एल. शर्मा, प्रो. एल.सी. अग्रवाल, प्रो. के.आर. चौधरी, प्रो. सुबोध कुमार एवं प्रो. आलोक चौधरी जैसे वरिष्ठ अकादमिक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
विकसित भारत के लक्ष्यों में भूगोल की प्रासंगिकता और 13 तकनीकी सत्रों में समकालीन विषयों पर मंथन
कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि वर्ष 2047 के ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में भूगोल विषय की अत्यंत महत्वपूर्ण और बुनियादी भूमिका है। देश की सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी जटिल चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने में भौगोलिक दृष्टिकोण बेहद उपयोगी साबित होता है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान कुल 13 विशेष तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें भौगोलिक चिंतन, शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक परिदृश्य, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सततता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एमएसएमई एवं जैव विविधता संरक्षण, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, नगरीकरण एवं ग्रामीण विकास, स्मार्ट सिटी एवं स्थानिक डेटा अवसंरचना, परिवहन एवं संपर्क अवसंरचना, क्षेत्रीय विकास, विश्व भू-राजनीति तथा ऊर्जा संकट जैसे समकालीन और ज्वलंत विषयों पर देश भर से आए शोधकर्ताओं द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
नागार्जुन भवन में भव्य उद्घाटन समारोह और दिग्गज वक्ताओं का मार्गदर्शन
राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य उद्घाटन समारोह 17 सितम्बर को प्रातः 11 बजे कोटा विश्वविद्यालय परिसर स्थित विश्वविद्यालय सभागार, नागार्जुन भवन में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से सरस्वती वंदना एवं राष्ट्रगीत के साथ होगा, जिसके पश्चात सम्मेलन संयोजक प्रो. जे.पी. शर्मा स्वागत उद्बोधन देंगे। इस समारोह में राजस्थान भूगोल परिषद् के अध्यक्ष प्रो. संतोष आनंद अध्यक्षीय उद्बोधन तथा महासचिव प्रो. एस.एस. भट्ट पूरे अधिवेशन की रूपरेखा व जानकारी प्रस्तुत करेंगे। इस उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं ‘भूगोल रत्न’ प्रो. एच.एस. शर्मा होंगे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत करेंगे। इसके अलावा, इस गरिमामयी अवसर पर प्रतिष्ठित प्रो. ए.एन. भट्टाचार्य स्मृति व्याख्यान भी आयोजित किया जाएगा, जिसकी मुख्य वक्ता महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी, बड़ौदा की प्रोफेसर रोली कंचन होंगी।
युवा भूगोलवेत्ता पुरस्कार सत्र, स्मृति व्याख्यान एवं 19 सितम्बर को समापन समारोह
सम्मेलन के दूसरे दिन युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘यंग ज्योग्राफर अवार्ड’ हेतु शोध-पत्र प्रस्तुति का एक विशेष सत्र रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट अकादमिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इस दौरान प्रो. एम.डी. शेख स्मृति व्याख्यान भी संपन्न होगा, जिसके मुख्य वक्ता राजस्थान भूगोल परिषद् के महासचिव प्रो. एस.एस. भट्ट होंगे। इस विशेष सत्र की अध्यक्षता प्रो. बी.एल. तेली तथा सह-अध्यक्षता कॉलेज शिक्षा, उदयपुर के सहायक निदेशक प्रो. सतीश आचार्य द्वारा की जाएगी। इसके उपरांत, तीन दिवसीय इस अकादमिक मंथन का समापन समारोह 19 सितम्बर को आयोजित होगा। समापन सत्र में सम्मेलन संयोजक प्रो. जे.पी. शर्मा विस्तृत रिपोर्ट तथा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. संतोष आनंद अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस समापन समारोह के मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. शहाब फजल होंगे, तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु प्रोफेसर विमला डूंकवाल एवं राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलगुरु प्रोफेसर निमित रंजन चौधरी अपनी उपस्थिति प्रदान करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत करेंगे और अंत में आयोजन सचिव डॉ. जितेश जोशी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा।
राजस्थान भूगोल परिषद् का गौरवशाली इतिहास और अकादमिक विरासत
उल्लेखनीय है कि राजस्थान भूगोल परिषद् की स्थापना वर्ष 1965 में राज्य के भूगोलवेत्ताओं के प्रथम सम्मेलन के अवसर पर की गई थी। अपने स्थापना काल से लेकर अब तक यह परिषद् देश और प्रदेश में भूगोल के क्षेत्र में उच्च कोटि के शोध, अकादमिक संवाद, ज्ञान-विनिमय और युवा शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन के लिए अनवरत कार्य करती आ रही है। परिषद् की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘Annals of Rajasthan Geographical Association’ इसकी अकादमिक गतिविधियों और शोध प्रकाशनों का एक सशक्त स्तंभ है। आयोजकों के अनुसार, कोटा विश्वविद्यालय में आयोजित होने जा रहा यह 52वां राष्ट्रीय सम्मेलन कोटा शहर को देश के प्रमुख अकादमिक और बौद्धिक संवाद के एक नए केंद्र के रूप में राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से रेखांकित करेगा।
