सनातन की एकता सर्वोपरि: शंकराचार्य विवाद समाप्त करें- स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा | 16 फरवरी

स्वामी अवधेशाचार्य महाराज, बड़ा भक्तमाल अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं रामधाम सेवा आश्रम कोटा के संस्थापक, ने शंकराचार्य से जुड़े वर्तमान विवाद पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे शीघ्र समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह विवाद न केवल सनातन धर्म की गरिमा को आहत कर रहा है, बल्कि व्यापक हिन्दू समाज के हितों को भी प्रभावित कर रहा है।

पत्रकारों से संवाद में उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक संत के रूप में वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से आग्रह करते हैं कि वे इस प्रकरण को आगे न बढ़ाते हुए इसे विराम दें। उनके अनुसार, यदि उद्देश्य गंगाजी में स्नान करना था, तो गंगा का प्रवाह सर्वत्र उपलब्ध है; ऐसे में किसी विशेष स्थल को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि इस प्रकरण को अनावश्यक रूप से तूल देकर राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया, जिसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को प्रभावित करना प्रतीत होता है।

स्वामी अवधेशाचार्य महाराज ने कहा कि गौ-संरक्षण जैसे विषयों पर सरकार की नीयत पर प्रश्न उठाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में धारा 370 हटाने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कदम उठाए गए। वहीं, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की सुदृढ़ता और अपराध नियंत्रण का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य पद को लेकर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की है। उनका कथन केवल इतना था कि जैसे प्रत्येक व्यक्ति मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं बन सकता, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता—यह एक सामान्य और यथार्थपरक बात है।

स्वामी अवधेशाचार्य ने कहा कि यदि इस विषय में सर्वोच्च न्यायालय से कोई रोक नहीं है, तो न्यायिक निर्णय का सम्मान सभी को करना चाहिए। उन्होंने संत समाज से आह्वान किया कि न्यायालय की अनुमति और व्यवस्था का सामूहिक रूप से सम्मान करते हुए एकजुटता बनाए रखें।

उन्होंने आगे कहा कि शंकराचार्य की चारों पीठें किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा की पंचायती व्यवस्था का अंग हैं, जिन पर निर्णय धर्माचार्यों, विद्वानों और संतों की सामूहिक सहमति से होते हैं। विवाद उत्पन्न करना आचार्य परंपरा की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

अंत में उन्होंने पुनः अपील की कि व्यक्तिगत मतभेदों को विराम देकर समस्त संत समाज को सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय एकता के उद्देश्य पर केंद्रित होना चाहिए—इसी में देश और समाज का व्यापक हित निहित है।

रामधाम मंदिर पर बनेगा भव्य सिंहद्वार

इस अवसर पर रामधाम सेवा आश्रम के मुख्य पुजारी लक्ष्मणदास महाराज ने जानकारी दी कि रामधाम सेवा आश्रम ट्रस्ट द्वारा रामधाम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक भव्य सिंहद्वार का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं तथा निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।


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