Written by : Sanjay kumar



कोटा, 8 मई
कोटा: विश्वविद्यालय कोटा एवं दिवाथर्व विकास फाउंडेशन (DVF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “द जामवंत सीरीज़” राष्ट्रीय संगोष्ठी का 8 मई 2026 को सफलतापूर्वक एवं गरिमामय समापन हुआ। यह एक दिवसीय आयोजन प्रातः 10 बजे से सायं 3 बजे तक विभिन्न सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाईकार्यक्रम की शुरुआत विधिवत रूप से सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात उद्घाटन सत्र में सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया एवं आयोजन के उद्देश्यों को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम मंच संचालन युवराज आशावत द्वारा किया गया
मुख्य वक्ता राजदूत डॉ. दीपक वोहरा
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एवं केंद्रीय उद्बोधन मुख्य वक्ता राजदूत डॉ. दीपक वोहरा द्वारा दिया गया।
उन्होंने भारत की सभ्यतागत शक्ति, रणनीतिक आत्मनिर्भरता एवं वैश्विक भूमिका पर अत्यंत प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। अपने संबोधन में उन्होंने “हनुमान-प्रेरित रणनीतिक चेतना” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर निर्णायक, साहसी एवं आत्मविश्वासी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी रणनीतिक सोच का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया कि आधुनिक भारत को नीति, सुरक्षा एवं वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में तीव्र, सटीक और प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए।
पैनल एवं तकनीकी सत्र
राष्ट्रगान के उपरांत तकनीकी एवं पैनल चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए—
डॉ. गोपाल सिंह — अर्थशास्त्री एवं मानस विद्वान (मॉडरेटर)
उन्होंने आर्थिक विकास एवं भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोण के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए भारत की वैश्विक भूमिका का विश्लेषण किया।
डॉ. सुरभि गोयल — मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं मोटिवेशनल स्पीकर
उन्होंने युवाओं में मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन एवं संज्ञानात्मक लचीलापन के महत्व पर प्रकाश डाला।
के. बी. नंदवाना (DVF सलाहकार)
उन्होंने संगठनात्मक विकास एवं सामाजिक सहभागिता पर विचार साझा किए।
डॉ. नीलू चौहान (डीन, छात्र कल्याण, UOK)
उन्होंने छात्र विकास, नेतृत्व क्षमता एवं शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।
डॉ. अमित एस. राठौड़ (अध्यक्ष, ISTD कोटा) एवं
अनुप कुमार (अध्यक्ष, ISTD देहरादून)
ने कौशल विकास एवं प्रशिक्षण आधारित शिक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
जी. डी. पटेल (DVF सलाहकार)
उन्होंने सामाजिक परिवर्तन एवं विकास मॉडल पर विचार रखे। कार्यक्रम के समापन सत्र में विश्वविद्यालय कुलपति द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने इस आयोजन को एक “वैचारिक एवं शैक्षणिक मील का पत्थर” बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया।यह संगोष्ठी न केवल एक शैक्षणिक आयोजन रही, बल्कि इसने भारत की सभ्यतागत चेतना, नेतृत्व क्षमता एवं वैश्विक भूमिका पर एक गहन संवाद स्थापित किया। आयोजन को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया गया।..
