Written by : Sanjay kumar
कोटा विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुई “द जामवंत सीरीज़” राष्ट्रीय संगोष्ठी, डॉ. दीपक वोहरा ने युवाओं को दिया आत्मविश्वासी भारत का संदेश
कोटा, 8 मई।
कोटा विश्वविद्यालय एवं दिवाथर्व विकास फाउंडेशन (DVF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “द जामवंत सीरीज़” का गुरुवार को अत्यंत गरिमामय एवं सफल समापन हुआ। प्रातः 10 बजे से सायं 3 बजे तक चले इस एकदिवसीय आयोजन में देशभर से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी में भारत की सभ्यतागत चेतना, युवा नेतृत्व, रणनीतिक आत्मनिर्भरता एवं वैश्विक भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर एवं सारगर्भित विमर्श हुआ।

सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत रूप से सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया तथा आयोजन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन युवराज आशावत द्वारा किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ. दीपक वोहरा ने रखा “हनुमान-प्रेरित रणनीतिक चेतना” का दृष्टिकोण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वरिष्ठ राजनयिक एवं मुख्य वक्ता राजदूत डॉ. दीपक वोहरा का प्रेरक उद्बोधन रहा। उन्होंने भारत की सभ्यतागत शक्ति, रणनीतिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर निर्णायक, साहसी और आत्मविश्वासी दृष्टिकोण अपनाना होगा।


उन्होंने “हनुमान-प्रेरित रणनीतिक चेतना” की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति है। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी रणनीतिक सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक भारत को नीति, सुरक्षा और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में तीव्र, सटीक और प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए।
तकनीकी एवं पैनल सत्रों में हुआ गहन विमर्श
राष्ट्रगान के उपरांत आयोजित तकनीकी एवं पैनल चर्चा सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
अर्थव्यवस्था और भारतीय दृष्टिकोण पर चर्चा
अर्थशास्त्री एवं मानस विद्वान डॉ. गोपाल सिंह ने मॉडरेटर के रूप में आर्थिक विकास एवं भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोण के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए भारत की वैश्विक भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और नेतृत्व पर विशेष जोर
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सुरभि गोयल ने युवाओं में मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और संज्ञानात्मक लचीलापन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
संगठनात्मक विकास और सामाजिक सहभागिता पर विचार
के. बी. नंदवाना (DVF सलाहकार) ने संगठनात्मक विकास एवं सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए, वहीं जी. डी. पटेल (DVF सलाहकार) ने सामाजिक परिवर्तन एवं विकास आधारित मॉडल पर सारगर्भित प्रस्तुति दी।
छात्र कल्याण, कौशल विकास और प्रशिक्षण आधारित शिक्षा पर मंथन
डॉ. नीलू चौहान, डीन छात्र कल्याण, विश्वविद्यालय कोटा ने छात्र नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
वहीं डॉ. अमित एस. राठौड़, अध्यक्ष ISTD कोटा एवं अनुप कुमार, अध्यक्ष ISTD देहरादून ने कौशल विकास, प्रशिक्षण आधारित शिक्षा और उद्योगोन्मुखी शिक्षण प्रणाली की उपयोगिता पर विस्तार से विचार रखे।
कुलपति प्रो. बी. एल. वर्मा ने बताया “वैचारिक एवं शैक्षणिक मील का पत्थर”
समापन सत्र में कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी. एल. वर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए इस संगोष्ठी को “वैचारिक एवं शैक्षणिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, वैचारिक स्पष्टता एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में भविष्य में भी इस प्रकार के बौद्धिक एवं प्रेरणादायक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया।
संगोष्ठी के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए डॉ. दीपक वोहरा
कार्यक्रम के उपरांत राजदूत डॉ. दीपक वोहरा ने पत्रकारों से अनौपचारिक संवाद करते हुए देश की अर्थव्यवस्था, बढ़ती जीडीपी, वैश्विक संकटों के बीच भारत की मजबूत स्थिति तथा पड़ोसी देशों की बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व मंच पर निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है और “विश्व गुरु” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP-2020 को भविष्य की पीढ़ियों के लिए परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि यह नीति जेन-अल्फा पीढ़ी को कौशल, नवाचार, शोध, तकनीक एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक ज्ञान, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा आयोजन
संगोष्ठी ने केवल एक शैक्षणिक आयोजन के रूप में ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत चेतना, नेतृत्व क्षमता एवं वैश्विक भूमिका पर व्यापक राष्ट्रीय संवाद स्थापित करने के मंच के रूप में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं भविष्यदर्शी आयोजन बताया।
