Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 12 जुलाई : राजस्थान के परिवहन जगत में ‘व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस’ (VLTD) की अनिवार्यता को लेकर जारी गतिरोध अब एक बड़े आंदोलन में बदल चुका है। राज्य भर के ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन ‘चक्का जाम’ का ऐलान किया है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, जनजीवन और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर संकट के बादल छा गए हैं।
किन वाहनों पर है अनिवार्यता?
सरकार द्वारा यह नियम निम्नलिखित वाणिज्यिक वाहनों के लिए अनिवार्य किया गया है:
सभी प्रकार की सार्वजनिक और निजी बसें (स्टेज/कॉन्ट्रैक्ट कैरिज)।
टैक्सियाँ (पर्यटक, ऑल इंडिया परमिट और ऐप-आधारित कैब)।
स्कूली बसें (छात्र सुरक्षा के लिए)।
खतरनाक माल (Hazardous goods) ढोने वाले भारी वाहन।
वीएलटीडी (VLTD): एक विश्लेषण
वीएलटीडी (AIS-140 प्रमाणित) एक आधुनिक तकनीक है, जिसे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किया गया है। सकारात्मक पहलुओं (Positives) की बात करें तो यह डिवाइस GPS और भारत की स्वदेशी ‘NavIC’ प्रणाली का उपयोग कर वाहन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करता है। इसमें लगा ‘पैनिक बटन’ आपातकालीन स्थिति में सीधे 112 (ERSS) से जुड़ जाता है, जिससे अपराधों पर अंकुश लगाने और दुर्घटनाओं में त्वरित राहत पहुँचाने में मदद मिलती है। वहीं, इसके नकारात्मक पहलुओं (Negatives) को देखें तो वर्तमान में इसकी अत्यधिक कीमत (लगभग 30,000 रुपये तक), कुछ चुनिंदा कंपनियों का एकाधिकार, और तकनीकी खराबी (जैसे नेटवर्क इश्यू या सर्वर डाउन) के कारण ट्रांसपोर्टरों को अनुचित रूप से दंडित किया जाना मुख्य चुनौतियां हैं। स्पष्ट SOP के अभाव में इसे लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयाँ पैदा कर रहा है।
ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख आपत्तियां और पूर्व मंत्री का रुख
ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधियों (रामावतार मोर, उपेंद्र मित्तल, सुरेश पूनिया) ने सरकार के वर्तमान कार्यान्वयन मॉडल का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया है कि बिना उचित तैयारी के थोपा गया यह नियम व्यवसाय के लिए घातक है। इस मुद्दे पर पूर्व परिवहन मंत्री ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार वीएलटीडी के नाम पर वाहन मालिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने इसे पूर्व में लागू किए गए स्मार्ट मीटर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की तर्ज पर जनता की जेब काटने वाला निर्णय करार दिया है। खाचरियावास ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समाधान नहीं निकाला, तो वे ट्रांसपोर्टरों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
नियम पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई
परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे:
- आर्थिक दंड: मोटर वाहन अधिनियम के तहत निरंतर चालान और भारी जुर्माना।
- फिटनेस प्रमाणपत्र का स्थगन: डिवाइस न होने पर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा, जिससे वाहन का सड़क पर चलना अवैध हो जाएगा।
- परमिट निरस्तीकरण: बार-बार नियमों के उल्लंघन पर वाहन का परिचालन परमिट (Permit) रद्द कर दिया जाएगा।
- चेकपोस्ट पर जप्ती: सीमाओं पर विशेष चेकिंग अभियान चलाकर बिना वीएलटीडी वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है।
‘चक्का जाम’ का व्यापक प्रभाव
राजस्थान में लगभग 10 लाख ट्रकों के पहिए थमने से पूरे प्रदेश की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा सकती है। इसका सीधा प्रभाव दैनिक उपभोग की वस्तुओं जैसे दूध, फल-सब्जियों और किराना पर पड़ेगा, जिससे बाजार में इनकी किल्लत और कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। चिकित्सा सेवाएं भी इससे अछूती नहीं रहेंगी, क्योंकि दवाइयों की आपूर्ति बाधित होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही, औद्योगिक कच्चे माल, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और निर्माण सामग्री (सीमेंट, सरिया) की आपूर्ति रुकने से प्रदेश का पूरा निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र पूरी तरह ठप हो जाएगा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
निष्कर्ष और अपील
वीएलटीडी एक सुरक्षा-केंद्रित तकनीक है, लेकिन इसकी सफलता के लिए यह अनिवार्य है कि सरकार इसे थोपने के बजाय संवाद से लागू करे। ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि डिवाइस की कीमतें तर्कसंगत हों, प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जाए और जब तक व्यवस्था सुचारु न हो, तब तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। जनहित में सरकार और ट्रांसपोर्ट संघों को तत्काल टेबल पर बैठकर समाधान निकालना चाहिए।
