Written by : Sanjay kumar
भीलवाड़ा, 11 जुलाई। राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में महज छह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। सभी महिलाओं की सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटनाक्रम के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑपरेशन थिएटर का कल्चर टेस्ट पॉजिटिव, सभी सर्जरी तत्काल रोकी गईं
घटना के बाद ऑपरेशन थिएटर की माइक्रोबायोलॉजी जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण (कल्चर टेस्ट पॉजिटिव) मिलने की पुष्टि हुई। रिपोर्ट सामने आते ही अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन थिएटर को तत्काल बंद कर दिया और वहां होने वाले सभी सिजेरियन ऑपरेशन रोक दिए। पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है।
जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां
प्रारंभिक जांच में अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे थे, जबकि पूरे अस्पताल में केवल पांच सर्जिकल सेट उपलब्ध थे। एक सर्जिकल सेट को पूरी तरह जीवाणुमुक्त (स्टेरलाइज) करने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है। ऐसे में उपकरणों की कमी के कारण संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जांच टीम ने मरीजों को दिए गए इंजेक्शन और अन्य दवाओं के नमूने भी जांच के लिए सुरक्षित कर लिए हैं, ताकि सभी संभावित कारणों की निष्पक्ष जांच की जा सके।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा
अस्पताल प्रशासन और पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ का कहना है कि अधिकांश महिलाएं गंभीर अवस्था में दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर यहां पहुंची थीं। प्रशासन के अनुसार कई मरीज गंभीर एनीमिया, अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य जटिल चिकित्सीय समस्याओं से भी पीड़ित थीं। अस्पताल का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के गंभीर आरोप
मृतक महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भर्ती के समय मरीजों की स्थिति सामान्य थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि यदि शुरुआती मौतों के बाद ही ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की जानकारी सार्वजनिक कर समय रहते ऑपरेशन रोक दिए जाते, तो बाद की कई जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे बड़े सवाल
भीलवाड़ा की यह घटना प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हाल के महीनों में राजस्थान के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं से जुड़े कई चिंताजनक मामले सामने आए हैं। ऐसे में सुरक्षित मातृत्व सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण, पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूताओं की मौत का वास्तविक कारण क्या था और किसी स्तर पर यदि लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, संसाधनों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
