Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 13 जुलाई।
राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार रात 12 बजे से प्रदेशभर में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई। हड़ताल के चलते प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस हड़ताल को प्रदेश के कई बड़े ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
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हड़ताल का मुख्य मुद्दा व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), ई-डिटेक्शन चालान, परमिट संबंधी नियम तथा परिवहन विभाग की नई व्यवस्थाएं हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने नियम तो लागू कर दिए, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए आवश्यक आधारभूत व्यवस्था और स्पष्ट एसओपी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसका सीधा आर्थिक बोझ वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर पड़ रहा है।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि वर्तमान में VLTD लगाने के लिए केवल सीमित कंपनियों को अधिकृत किया गया है, जो एक डिवाइस के लिए लगभग 30 हजार रुपये तक वसूल रही हैं, जबकि अन्य राज्यों में यही डिवाइस करीब 3 हजार रुपये में उपलब्ध है। संगठनों ने अधिक कंपनियों को अधिकृत करने, पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और सरकार द्वारा तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
इसी क्रम में कोटा ट्रांसपोर्ट कंपनी एसोसिएशन के नेतृत्व में ट्रांसपोर्ट नगर में विरोध रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित विभिन्न ट्रांसपोर्ट प्रतिष्ठानों को बंद कराते हुए सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान ट्रांसपोर्टरों ने VLTD को अनिवार्य किए जाने, ई-डिटेक्शन चालानों की व्यवस्था तथा ट्रांसपोर्ट नगर में बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ भी जोरदार आवाज उठाई।
कोटा ट्रांसपोर्ट कंपनी एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुसूदन खंडेलवाल ने कहा कि पहले से ही बाजार में मंदी, बढ़ती लागत और घटते कारोबार के कारण ट्रांसपोर्टर एवं वाहन मालिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में महंगी VLTD डिवाइस लगाने का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उन पर डालना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ट्रांसपोर्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, ट्रांसपोर्ट नगर से अतिक्रमण हटाया जाए तथा परिवहन व्यवसाय को राहत देने वाले व्यावहारिक निर्णय जल्द लिए जाएं।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिससे माल परिवहन, व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। प्रदेशभर के ट्रांसपोर्टरों ने एकजुट होकर सरकार से जल्द वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।
