बड़ा खुलासा :1 करोड़ की सरकारी छात्रवृत्ति खा गए कॉलेज और बैंक के अधिकारी!

Written by : Sanjay kumar

भोपाल, 13 जुलाई। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सरकारी छात्रवृत्ति योजना में कथित तौर पर करीब एक करोड़ रुपये के घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन और बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एमबीए छात्रों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर सरकारी छात्रवृत्ति की राशि हड़प ली गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन छात्रों के नाम पर खाते खोले गए, उनमें से कई को इसकी भनक तक नहीं लगी।

बिना जानकारी के छात्रों के नाम पर खोले गए बैंक खाते

सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच भोपाल के एक निजी मैनेजमेंट कॉलेज से जुड़े लोगों और यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से 118 बैंक खाते खोले। ये खाते एमबीए छात्रों के नाम पर खोले गए, जबकि अधिकांश छात्रों ने न तो बैंक में खाता खुलवाया, न किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और न ही छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था।

करीब एक करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का हुआ गबन

जांच में सामने आया है कि इन खातों में सरकार की ओर से लगभग 99 लाख 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति जमा हुई। आरोप है कि यह पूरी राशि छात्रों तक पहुंचने से पहले ही निकाल ली गई और सरकारी धन का गबन कर लिया गया। सीबीआई का मानना है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया।

फर्जी दस्तावेज और नकली हस्ताक्षरों से किया गया खेल

जांच एजेंसी के अनुसार छात्रों के नाम और दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी अकाउंट ओपनिंग फॉर्म तैयार किए गए। इन फॉर्मों पर कथित रूप से छात्रों के नकली हस्ताक्षर किए गए और कई स्थानों पर गलत व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की गई। बैंक में खाता खोलने के दौरान अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पूरी दिखा दी गई।

छात्रों की जगह कॉलेज अधिकारियों के मोबाइल नंबर जुड़े

घोटाले का सबसे अहम पहलू यह सामने आया कि बैंक खातों में छात्रों के मोबाइल नंबर दर्ज करने के बजाय कॉलेज अधिकारियों या उनके करीबी लोगों के मोबाइल नंबर जोड़े गए। इससे खाते से संबंधित सभी ओटीपी और बैंकिंग संदेश सीधे आरोपियों तक पहुंचते रहे और खातों का पूरा नियंत्रण उनके हाथ में रहा।

एटीएम कार्ड भी छात्रों को नहीं दिए गए

सीबीआई के अनुसार बैंक द्वारा जारी किए गए सभी एटीएम कार्ड छात्रों को देने के बजाय कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा को सौंप दिए गए। इसके बाद जैसे ही छात्रवृत्ति की राशि खातों में जमा होती, एटीएम कार्ड और ओटीपी की मदद से तुरंत रकम निकाल ली जाती थी। इससे छात्रों को इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तक नहीं मिल पाई।

बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच में यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि खाते खोलने से पहले दस्तावेजों की जांच, केवाईसी सत्यापन, मोबाइल नंबर की पुष्टि और एटीएम जारी करने जैसी आवश्यक बैंकिंग प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। सीबीआई का आरोप है कि बैंक अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन ने आपराधिक साजिश के तहत सरकारी धन का गबन किया।

छह लोगों के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर

सीबीआई ने इस मामले में यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा, भोपाल स्थित एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा, प्रोफेसर आदित्य मल्होत्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर विनेश मेश्राम तथा कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसके साथ ही अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और जांच में सहयोग करने की बात कही है।

जांच का दायरा बढ़ा, हो सकती हैं और गिरफ्तारियां

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या फर्जीवाड़ा केवल 118 खातों तक सीमित था या अन्य छात्रों और संस्थानों में भी इसी तरह के फर्जी खाते खोलकर छात्रवृत्ति की राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसी बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, एटीएम निकासी, सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है। मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

छात्रवृत्ति पर डाका, युवाओं के भविष्य पर चोट

यह मामला केवल सरकारी धन के गबन का नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रहार है जिनके लिए सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मामला माना जाएगा।

Pramukh Samvad

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