Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली:24 जुलाई 2026
देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा व कठोर ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) की बैठक में पेपर लीक व परीक्षा धांधली के खिलाफ सख्त कानूनी संशोधनों के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
इस प्रस्तावित नए कानून को आगामी सोमवार (मॉनसून सत्र के दौरान) संसद के पटल पर पेश किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:
- 3 महीने में फैसला (फास्ट-ट्रैक कोर्ट): पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) गठित की जाएंगी। ये अदालतें 3 महीने (90 दिन) की समय-सीमा के भीतर मामले का निपटारा कर फैसला सुनाएंगी।
- 10 साल तक की कठोर जेल: पेपर लीक माफिया और संगठित अपराध गिरोहों के दोषियों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सख्त कैद का प्रावधान रखा गया है।
- ₹10 करोड़ का भारी जुर्माना: धांधली में शामिल माफियाओं, संस्थाओं व सेवा प्रदाताओं पर ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
- गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत दर्ज किए जाने वाले सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी।
- संपत्ति कुर्की एवं जब्ती: संगठित परीक्षा गिरोहों अथवा परीक्षा में धांधली में शामिल पायी जाने वाली संस्थाओं/सर्विस प्रोवाइडर्स की संपत्तियों की जब्ती (Attachment of Property) की जाएगी और रद्द हुई परीक्षा का पूरा खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा।
नए कानून और पृष्ठभूमि से जुड़ी अन्य सटीक महत्वपूर्ण जानकारियाँ
इस कानून और प्रशासनिक कदमों से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण व प्रामाणिक बातें निम्नलिखित हैं:
| क्षेत्र / पहलू | नया प्रावधान एवं विस्तृत जानकारी |
|---|---|
| दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा त्वरित एक्शन | प्रधानमंत्री के निर्देश के तुरंत बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में पेपर लीक मामलों के लिए पहली विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है, जहाँ विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा सुनवाई करेंगी। |
| शिक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक फेरबदल | नीट व अन्य परीक्षा विवादों के बीच सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल किया है। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। |
| पहले के कानून से तुलना | ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में पहले साधारण अनुचित साधनों के लिए 3 से 5 साल की सजा और ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान था, जिसे अब संगठित धांधली के संदर्भ में बढ़ाकर 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने के स्तर तक सख्त कर दिया गया है। |
| आंदोलनरत पक्षों से सीधा संवाद | सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्रियों (जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह) ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक व अन्य छात्रों से मुलाकात कर कानून में सख्त बदलावों का आश्वासन दिया, जिसके बाद अनशन समाप्त कराया गया। |
केंद्र सरकार का यह कदम देश के करोड़ों प्रतियोगी परीक्षार्थियों में विश्वास बहाल करने तथा संगठित परीक्षा माफिया की कमर तोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया सबसे सख्त कानूनी कदम माना जा रहा है।
