Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 30 जुलाई। सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा केवल एक परिपाटी नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य मार्ग है। इसी पावन परंपरा का अनुपम दृश्य 349, शास्त्री नगर, दादाबाड़ी स्थित स्पिरिचुअल सेंटर आश्रम में देखने को मिला, जहाँ गुरु पूर्णिमा महापर्व एवं महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भाव और आध्यात्मिक भव्यता के साथ आयोजित किया गया।
इस पावन अवसर पर पूज्य गुरुदेव आदियोगी मुकुंदराज जी महाराज के सानिध्य में साधकों और शिष्यों का समागम हुआ। आश्रम परिसर गुरुभक्ति के भजनों और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।




चरण वंदन और पावन आशीर्वाद
महोत्सव के शुभारंभ पर दूर-दराज से आए शिष्यों एवं साधकों ने गुरुदेव आदियोगी मुकुंदराज जी के चरणों में नमन कर चरण वंदन किया। गुरुदेव ने सभी श्रद्धालुओं को अपने ओजस्वी आशीर्वाद से कृतार्थ किया। शिष्यों की गुरु के प्रति अपूर्व श्रद्धा और समर्पण का माहौल संपूर्ण आश्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर रहा था।
दीक्षा एवं महाध्यान: अनंतानंद की अनुभूति
आध्यात्मिक चेतना के विस्तार हेतु कार्यक्रम को विशेष सोपानों में आयोजित किया गया:
- मंत्र दीक्षा (सायं 4:00 बजे): गुरुदेव द्वारा मुमुक्षु साधकों को नाम दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा के माध्यम से साधकों को जीवन में आत्म-साक्षात्कार और आत्म-कल्याण का संकल्प दिलाया गया।
- सामूहिक महाध्यान (सायं 5:30 बजे): गुरुदेव ने सभी शिष्यों को ध्यान की गहन अवस्था में प्रवेश कराया। इस ध्यान सत्र के दौरान आश्रम का वातावरण अत्यंत शांत और दिव्य हो गया, जहाँ उपस्थित प्रत्येक साधक ने अपने भीतर एक अनंतानंद और अलौकिक शांति की अनुभूति की।
संत वाणी एवं गुरु-शिष्य संबंध का मर्म (सायं 6:00 से 7:00 बजे)
सायंकालीन सत्र में गुरुदेव आदियोगी मुकुंदराज जी एवं पधारे हुए पूज्य संतों के दिव्य प्रवचन हुए। गुरुदेव ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा,
“गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतना हैं जो शिष्य के अज्ञानरूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश प्रज्वलित करती हैं। गुरु और शिष्य का संबंध सांसारिक नहीं, अपितु जन्मांतरों का आध्यात्मिक रिश्ता है। सच्चा शिष्य वही है जो गुरु की आज्ञा और ज्ञान को अपने आचरण में उतारे।”
सत्संग के दौरान संतों ने बताया कि कैसे एक शिष्य गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन की विषमताओं से पार पा सकता है और अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
ज्ञानवर्धक जीवन-रूपांतरण
इस पावन महापर्व पर पधारे सभी शिष्यों ने गुरुमुख से प्रसारित ज्ञान-गंगा में डुबकी लगाई और अपने भावी जीवन को संवारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन महाआरती एवं महाप्रसाद के वितरण के साथ हुआ। आश्रम प्रबंधन ने आए हुए सभी भक्तों और साधकों का आभार व्यक्त किया।
