Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 6 अगस्त। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की केवल 10-11 जातियों के एक हजार से अधिक लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाया है। अब राज्य सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन कर नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
करीब 900 पन्नों में तैयार हुई रिपोर्ट
आयोग की रिपोर्ट दो भागों में तैयार की गई है, जिसमें कुल करीब 900 पन्नों का विस्तृत विवरण शामिल है। पहले भाग में ओबीसी के जनाधार, फील्ड सर्वे, पिछले दो पंचायत एवं निकाय चुनावों के आंकड़े, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाएं तथा जातिवार राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विश्लेषण दिया गया है। दूसरे भाग में पंचायतों और नगरीय निकायों के वार्ड एवं पदवार ओबीसी प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।
74.85 लाख परिवारों का हुआ सर्वे
रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया। सर्वे के दौरान 19 प्रश्न पूछे गए, जिनमें परिवार के किसी सदस्य को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से जुड़े सवाल भी शामिल थे। सर्वे के आधार पर आयोग ने प्रदेश में ओबीसी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी का विस्तृत आकलन किया है।
जाट समाज का सबसे अधिक प्रतिनिधित्व
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में जाट समाज की आबादी सबसे अधिक है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी सबसे ज्यादा इसी समाज को मिला है। पिछले दो पंचायत एवं निकाय चुनावों के विश्लेषण में पाया गया कि आरक्षण के माध्यम से ओबीसी को कुल 10 से 14 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व मिला, जबकि सामान्य श्रेणी से चुनाव जीतने के कारण पंचायतों में यह प्रतिनिधित्व लगभग 46 प्रतिशत और नगरीय निकायों में करीब 38 प्रतिशत तक पहुंच गया।
309 निकायों में 60 अध्यक्ष पद होंगे ओबीसी के लिए आरक्षित
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसी अनुपात में पंचायती राज संस्थाओं में भी आरक्षण लागू होने की संभावना है। आरक्षण की अंतिम तस्वीर लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। इस बार लॉटरी पारंपरिक पर्चियों के बजाय कंप्यूटराइज्ड प्रणाली से निकाली जाएगी।
कानूनी प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश नहीं
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओबीसी आरक्षण से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों में किसी प्रकार के बदलाव की सिफारिश नहीं की है। सरकार रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री आवास पर सौंपा गया प्रतिवेदन
आयोग अध्यक्ष पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंपी। इस अवसर पर मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी मौजूद रहे। आयोग ने मुख्यमंत्री को गोल्डन कवर में रिपोर्ट भेंट की तथा पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया।
इन जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए सभी सीटें आरक्षित
रिपोर्ट के अनुसार सलूम्बर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए शत-प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
मुख्यमंत्री बोले— समय पर होंगे स्थानीय चुनाव
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि “वन स्टेट-वन इलेक्शन” व्यवस्था से विकास कार्यों में निरंतरता आएगी तथा समय, धन और संसाधनों की बचत होगी।
