Written by : Sanjay kumar
Date : 18 August 2026
रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बार फिर डेडलाइन का खेल शुरू हो चुका है। सरकार और तेल कंपनियों (जैसे Indane, HP, Bharat Gas) द्वारा एलपीजी कनेक्शन के लिए अनिवार्य की गई e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) की अंतिम तिथि पहले 16 अगस्त तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 23 अगस्त कर दिया गया है। जिन लोगों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें 23 तारीख तक का मौका मिला है।
लेकिन, राहत की इस खबर के पीछे छिपा सिस्टम का सच बेहद निराशाजनक है। सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक थोपी गई इस अनिवार्यता ने आम जनता, बुजुर्गों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस पूरी प्रक्रिया और इसके जमीनी क्रियान्वयन में कई गंभीर खामियां सामने आ रही हैं।
सिस्टम की बड़ी खामियां और आम जनता की परेशानियां
1. ठप पड़ा ऑनलाइन पोर्टल और सर्वर की नाकामी
सरकार ने दावा किया कि उपभोक्ता घर बैठे आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के जरिए फेस रिकॉग्निशन या ऑनलाइन माध्यम से ई-केवाईसी कर सकते हैं। हकीकत यह है कि इस पोर्टल पर ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि सिस्टम हमेशा डाउन या बंद रहता है। लॉगिन न होने के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में बैठे लोग चाहकर भी ऑनलाइन ई-केवाईसी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सिस्टम ऐसा प्रतीत होता है जो सहूलियत देने के बजाय जनता को सिर्फ उलझाने के लिए बनाया गया हो।
2. डिस्ट्रीब्यूटरों के पास कोई लिखित आदेश नहीं (मौखिक फरमान)
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार और तेल कंपनियों ने ई-केवाईसी का यह नियम जनता पर तो जबरदस्ती थोप दिया है, लेकिन किसी भी गैस डिस्ट्रीब्यूटर को इसका कोई लिखित या आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है। डिस्ट्रीब्यूटरों को केवल मौखिक निर्देश दिए गए हैं।
इसके चलते जमीन पर अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है:
- ऑनलाइन पोर्टल पर गैस की बुकिंग भी स्वीकार हो रही है और ऑनलाइन पेमेंट भी जमा हो रहा है।
- लेकिन, मौखिक आदेश के आधार पर डिस्ट्रीब्यूटरों को सिलेंडर देने से रोक दिया गया है।
- जब ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद एजेंसी पर सिलेंडर लेने पहुंचते हैं और उन्हें बैरंग लौटाया जाता है, तो वे हंगामा करते हैं। इस आपसी खींचतान में व्यावहारिक तौर पर पिसना सिर्फ आम उपभोक्ता और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर को पड़ रहा है।
3. बुजुर्गों और विदेश में रहने वालों के लिए बड़ी मुसीबत
- बायोमेट्रिक विफलता (Biometric Issues): बुजुर्ग नागरिकों के लिए बायोमेट्रिक ई-केवाईसी एक सजा बन गई है। उम्रदराज लोगों के फिंगरप्रिंट घिस जाने या रेटिना स्कैन मैच न होने के कारण फिंगरप्रिंट स्कैनर काम नहीं करते, जिससे वे बार-बार चक्कर काटने को मजबूर हैं।
- विदेश में रह रहे भारतीय: कई लोग अपने नाम से एलपीजी कनेक्शन लेकर आजीविका या पढ़ाई के सिलसिले में विदेशों में रह रहे हैं। लेकिन, यह ई-केवाईसी ऐप और सिस्टम विदेशों में सुचारू रूप से काम नहीं करता, जिससे बाहर रह रहे नागरिकों के सामने कनेक्शन बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
4. जबरदस्ती थोपने की नीति और अन्य नियम
सरकार की ऐसी नीतियां जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार करती हैं। इससे पहले पीएनजी (PNG) गैस के संदर्भ में भी गजट नोटिफिकेशन लाकर लोगों पर जबरन कनेक्शन थोपने की कोशिश की गई थी, जबकि यह उपभोक्ता का बुनियादी अधिकार है कि वह अपनी सुविधा के अनुसार एलपीजी या पीएनजी में से किसे चुनें। इसी तरह एलपीजी में भी बिना व्यावहारिक तैयारी के ई-केवाईसी का डंडा चलाना जनता को राहत देने के बजाय केवल प्रशासनिक खानापूर्ति प्रतीत होता है।
अब आगे क्या करें?
चूंकि सरकार ने डेडलाइन को बढ़ाकर 23 अगस्त कर दिया है, इसलिए जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, वे निम्नलिखित तरीकों से इसे पूरा कर सकते हैं:
- ऑफलाइन विकल्प: अपने नजदीकी गैस डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय जाएं। साथ में अपना [Aadhaar Redacted], गैस पासबुक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर साथ रखें। फिंगर प्रिंट के जरिए यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
- ऑनलाइन विकल्प: यदि सर्वर साथ दे, तो संबंधित गैस कंपनी (IndianOil One, HP Pay, BPCL Hello BPCL) के ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन का प्रयास करें।
निष्कर्ष
ई-केवाईसी का उद्देश्य फर्जी और निष्क्रिय कनेक्शनों को रोकना बेशक सही हो सकता है, लेकिन जिस जल्दबाजी और बिना तैयारी के साथ इसे लागू किया गया है, उसने आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाने के बजाय और उलझा दिया है। जब तक सर्वर की तकनीकी कमियां दूर नहीं होतीं और जमीनी स्तर पर स्पष्ट व लिखित निर्देश जारी नहीं होते, तब तक ऐसी नीतियां जनहित के बजाय सिर्फ प्रशासनिक मनमानी बनकर रह जाती हैं।

