राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा का ‘जेन-जी और विनिंग फैक्टर’ पर जोर, तो कांग्रेस ने तय किया ‘वार्ड के वोटर, वहीं से टिकट’ का कड़ा नियम

Written by : Sanjay kumar

जयपुर:18 अगस्त।
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के नजदीक आते ही प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीतियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। जयपुर स्थित दोनों दलों के प्रदेश मुख्यालयों पर हाल ही में हुई मैराथन बैठकों के बाद टिकट वितरण और प्रत्याशियों के चयन के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन नए नियमों से स्पष्ट है कि इस बार चुनाव मैदान में केवल उन्हीं चेहरों को मौका मिलेगा जो संगठन के मानदंडों और स्थानीय कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरेंगे।

भाजपा की रणनीति: नेपोटिज्म पर पूर्ण विराम, ‘जेन-जी’ युवाओं पर फोकस

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की उपस्थिति में हुई उच्च स्तरीय बैठक में भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार की पारिवारिक सिफारिश या भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • केवल जिताऊ प्रत्याशी: टिकट का एकमात्र पैमाना केवल और केवल ‘विनिंग फैक्टर’ (जीतने की क्षमता) और स्थानीय प्रभाव होगा।
  • जेन-जी युवाओं को प्राथमिकता: पार्टी पहली बार निकाय चुनावों में जेन-जी वर्ग (18 से 25 वर्ष के युवा) के सक्रिय और ऊर्जावान युवाओं को तलाश कर उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
  • डिजिटल और विकास आधारित प्रचार: सरकार के पिछले ढाई वर्षों के विकास कार्यों और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और आईटी की संयुक्त डिजिटल टीमों को मैदान में उतारा जाएगा।

सोशल मीडिया पर भाजपा का संदेश:
“राजस्थान निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए भाजपा का स्पष्ट संदेश—सिफारिशी कल्चर की छुट्टी, केवल ‘विनिंग फैक्टर’ और ‘जेन-जी’ युवाओं का जोश बनेगा जीत की गारंटी। सबका साथ, सबका विकास और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के साथ हम जनता के बीच जा रहे हैं।”

कांग्रेस का फॉर्मूला: ‘जिस वार्ड का वोटर, वहीं से टिकट’ और 50% युवाओं को मौका

दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अगुवाई में जिलों से कड़ा फीडबैक लिया गया है। कांग्रेस ने पारदर्शिता और स्थानीय जुड़ाव को सबसे ऊपर रखा है।

वार्ड की सख्त पाबंदी: पार्टी ने साफ कर दिया है कि जो दावेदार जिस वार्ड का पंजीकृत मतदाता होगा, उसे केवल उसी वार्ड से टिकट मिलेगा। बाहरी प्रत्याशियों के लिए वार्ड स्तर पर पूरी तरह ‘नो-एंट्री’ रहेगी।

डिजिटल और ऑफलाइन बायोडाटा: चुनाव लड़ने वाले इच्छुक कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन पोर्टल के साथ ऑफलाइन माध्यम से भी आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र में उन्हें अपना पूरा राजनीतिक सफरनामा (सक्रियता, सांगठनिक पद और जीत के समीकरण) देना अनिवार्य किया गया है।

युवाओं को तवज्जो: पार्टी पहले ही निकाय चुनावों में युवाओं को 50 प्रतिशत तक टिकट देने की घोषणा कर चुकी है, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में उत्साह है।

सोशल मीडिया पर कांग्रेस का संदेश:
“स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी का संकल्प—पारदर्शिता और जवाबदेही। ‘जिस वार्ड का वोटर, वहीं से टिकट’ की नीति के तहत अब बाहरी उम्मीदवारों की कोई गुंजाइश नहीं है। युवाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देकर हम जनता के हक की लड़ाई मजबूत करेंगे।”

चुनावी समीकरण हुए दिलचस्प

दोनों ही प्रमुख दलों द्वारा तय की गई इन सख्त और स्पष्ट गाइडलाइंस से यह साफ हो गया है कि इस बार के स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले वाले होंगे। टिकट वितरण में वंशवाद और सिफारिश की जगह अब जमीनी पकड़ और योग्यता ने ले ली है, जिससे हजारों स्थानीय दावेदारों की उम्मीदें पूरी तरह बदल गई हैं।

Pramukh Samvad

ताजा खबरों को देखने के लिए प्रमुख संवाद से जुड़े

https://www.pramukhsamvad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!