Written by : Sanjay kumar
बारां, 27 अगस्त। राजस्थान के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक ऐसा दिलचस्प वाकया सामने आया है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार से जुड़ा यह मामला बारां जिले के अटरू नगर पालिका क्षेत्र का है। स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए गए एक सख्त कदम के बाद अब यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है, जहां नियमों की पालना को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासनिक अमले ने दो हाई-प्रोफाइल आवेदनों पर कैंची चला दी है।
वार्ड 21 की मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए दिया गया था आवेदन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे और बहू ने अटरू नगर पालिका के वार्ड 21 की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवाने के लिए विधिवत रूप से आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन का उद्देश्य आगामी स्थानीय चुनावी प्रक्रिया या मतदाता डेटाबेस में अपने नाम को जोड़ना था। हालांकि, किसी भी आम नागरिक की तरह इस आवेदन को भी प्रशासनिक जांच की सामान्य प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जहां कई चौंकाने वाली और दिलचस्प परतें खुलकर सामने आईं।
हस्ताक्षर की जगह अंगूठा लगाने पर एसटीएम को हुआ गहरा संदेह
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जब आवेदन पत्र जमा किए गए, तो उसमें हस्ताक्षर करने के निर्धारित स्थान पर अंगूठा लगाया गया था। जब अटरू की एसडीएम अंजना सहरावत के सामने यह आवेदन पहुंचा, तो हस्ताक्षर के स्थान पर अंगूठा देखकर उन्हें इस पर गहरा संदेह हुआ। एक प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर उन्होंने इस तकनीकी और प्रक्रियागत भिन्नता को नजरअंदाज न करते हुए मामले की तह तक जाने का फैसला किया और इसकी निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
5 सदस्यीय जांच कमेटी ने खोली 6 महीने रहने के दावे की पोल
संदेह के समाधान के लिए एसडीएम ने तुरंत प्रभाव से एक 5 सदस्यीय विशेष जांच कमेटी का गठन किया। इस कमेटी को निर्देश दिए गए कि वे वार्ड 21 में जाकर मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच करें और दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाएं कि आवेदक वास्तव में वहां पिछले 6 महीनों से रह रहे हैं या नहीं। कमेटी ने जब वार्ड में जाकर जमीनी स्तर पर पड़ताल की और दस्तावेजों को खंगाला, तो आवेदन में किया गया 6 महीने के निवास का दावा पूरी तरह से गलत पाया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने खारिज किए दोनों आवेदन
जांच कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम अंजना सहरावत को सौंप दी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि आवेदन पत्र में दी गई जानकारी और मौके पर पाई गई वास्तविक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है। रिपोर्ट के आधार पर यह साबित हो गया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रस्तुत किए गए निवास संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसके बाद, एसडीएम ने बिना किसी दबाव के प्रशासनिक नियमों का पालन करते हुए दोनों आवेदनों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।
