Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 28 अगस्त। राजस्थान में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा एएच1एन1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। देश के कुछ राज्यों, विशेषकर दिल्ली में एच1एन1 के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर राजस्थान में भी स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने बताया कि जनवरी 2026 से अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू के कुल 146 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को जांच, उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अगस्त में सबसे अधिक मामले सामने आए
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक स्वाइन फ्लू के मामलों में अलग-अलग महीनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी में 2, फरवरी में 3, मार्च में 20, अप्रैल में 22, मई में 25, जून में 14 और जुलाई में 5 मामले सामने आए। वहीं अगस्त माह में अब तक 55 पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं, जो इस वर्ष किसी एक महीने में सामने आए मामलों की सर्वाधिक संख्या है।
नए घातक स्ट्रेन की पुष्टि नहीं, घबराने की जरूरत नहीं
गायत्री राठौड़ ने कहा कि वर्तमान स्थिति को लेकर आमजन को अनावश्यक रूप से घबराने की आवश्यकता नहीं है। एच1एन1 वायरस के किसी नए अथवा अधिक घातक स्ट्रेन के प्रसार की पुष्टि नहीं हुई है। आईसीएमआर के अनुसार वर्तमान में प्रचलित एच1एन1 वायरस पहले से ही सक्रिय है। इसके बावजूद संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बरतना, लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।
बुखार, खांसी और गले में खराश को नजरअंदाज नहीं करें
स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है और इसके लक्षण सामान्य फ्लू की तरह दिखाई दे सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण शामिल हैं। अधिकांश लोग उचित देखभाल और चिकित्सकीय सलाह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण के कारण जटिलताओं का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
खांसी-छींक के दौरान रखें श्वसन स्वच्छता का ध्यान
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि खांसी अथवा छींक आने पर मुंह और नाक को रूमाल, टिश्यू या कोहनी से ढकें। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं तथा आवश्यकता होने पर हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें। बुखार, खांसी या गले में खराश जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। आवश्यकता पड़ने पर मास्क का उपयोग करें और पर्याप्त आराम के साथ तरल पदार्थों का सेवन करें।
सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें
स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सांस लेने में तकलीफ, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, ऑक्सीजन स्तर में कमी अथवा अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य संस्थान या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों में लक्षणों को हल्के में नहीं लेने की सलाह दी गई है।
बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा न लें
विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही अपनी ओर से दवा की खुराक निर्धारित कर लंबे समय तक दवा लेनी चाहिए। बीमारी की स्थिति में स्कूल, कार्यालय, समारोह अथवा अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए तथा संक्रमित या लक्षण वाले व्यक्ति के साथ अनावश्यक निकट संपर्क से भी बचना चाहिए।
राजकीय चिकित्सा संस्थानों में व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी
गायत्री राठौड़ ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू तथा मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है। सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों को मरीजों की जांच, उपचार और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का उद्देश्य संक्रमण की समय पर पहचान और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
सावधानी और समय पर उपचार ही बचाव का आधार
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि स्वाइन फ्लू को लेकर अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन लापरवाही भी न बरतें। फ्लू जैसे लक्षण सामने आने पर स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें और व्यक्तिगत स्वच्छता तथा श्वसन संबंधी सावधानियों का पालन करें। विभाग ने कहा कि जागरूकता, सावधानी और समय पर चिकित्सा सहायता के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
