Written by : Sanjay kumar
जयपुर/कोटा:13,सितंबर। राजस्थान के प्रमुख एजुकेशन हब कोटा के कोचिंग संस्थानों के अस्तित्व पर अचानक बड़ा संकट आन पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की प्रवर्तन शाखा द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जल्द ही कोटा, जोधपुर, सीकर और अन्य शहरों में भी प्रशासन कार्रवाई करने वाला है।
जयपुर के गोपालपुरा बाईपास सहित विभिन्न क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों को तेजी से सील किया जा रहा है और कई संस्थानों को बंद करने के नोटिस थमाए गए हैं। इस प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में कोटा, सीकर, जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े एजुकेशन हब्स से आए कोचिंग संचालकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि सरकार ने 5 दिसंबर 2025 से लागू किए गए अव्यावहारिक बिल्डिंग बायलॉज में ढील नहीं दी, तो वे अपना पूरा कारोबार राजस्थान से समेटकर पड़ोसी राज्यों में ले जाने को मजबूर होंगे।
कोटा के कोचिंग संचालकों का स्पष्ट कहना है कि बिना किसी पूर्व परामर्श और व्यावहारिक पक्ष को जाने सरकार ने कड़े नियम थोप दिए हैं, जिन्हें पूरा करना 90 प्रतिशत से अधिक संस्थानों के लिए नामुमकिन है।
आखिर किन शर्तों पर फंसा है पेंच?
राजस्थान सरकार द्वारा 5 दिसंबर 2025 से प्रभावी किए गए नए बिल्डिंग बायलॉज और हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के नियमों को लेकर कोचिंग संचालकों ने अपनी मुख्य आपत्तियां दर्ज कराई हैं:
- संस्थागत पट्टे की बाध्यता: नए नियमों के अनुसार, कोचिंग चलाने के लिए भूखंड का संस्थागत पट्टा (Institutional Lease) होना अनिवार्य है। जबकि हकीकत यह है कि सरकार की ओर से आज तक कोटा या अन्य शहरों के अधिकांश निजी कोचिंग संस्थानों को संस्थागत पट्टा जारी ही नहीं किया गया है।
- 500 वर्ग मीटर भूमि की न्यूनतम शर्त: नए बायलॉज में कोचिंग संचालन के लिए न्यूनतम 500 वर्ग मीटर भूमि की अनिवार्यता रखी गई है। कोटा की तंग कॉलोनियों और व्यावसायिक क्षेत्रों में बने अधिकांश पुराने संस्थानों के पास इतना बड़ा क्षेत्रफल उपलब्ध नहीं है।
- बिना स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के नियम लागू: संचालकों का आरोप है कि नीति बनाते समय शिक्षा जगत और ग्राउंड रियलिटी से जुड़े कोटा के कोचिंग प्रतिनिधियों से कोई सुझाव नहीं लिए गए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार/जेडीए की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों को लेकर दिए गए सख्त निर्देशों के बाद जेडीए और स्थानीय प्रशासन एक्शन मोड में हैं। नियमों के पालन के नाम पर सीधे सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।
कोचिंग संचालकों का तर्क है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन जब राज्य में कोचिंग चलाने के लिए जरूरी सरकारी पट्टे देने का ढांचा या नियम ही व्यावहारिक नहीं हैं, तो सीधे सील लगाकर हजारों कर्मचारियों और शिक्षकों की रोजी-रोटी छीनना न्यायसंगत नहीं है।
कोचिंग संचालकों की मुख्य मांगें
कोटा के कोचिंग उद्योग से केवल कोचिंग मालिक ही नहीं जुड़े हैं, बल्कि इसका पूरा इकोसिस्टम टिका हुआ है। पीजी (PG) संचालक, मेस, हॉस्टल, ऑटो चालक और छोटे दुकानदार पूरी तरह इन कोचिंग छात्रों पर निर्भर हैं। यदि कोटा जैसे हब में सेंटर बंद होते हैं, तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा।
कोचिंग एसोसिएशन ने सरकार और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि:
- इस मामले में तुरंत उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाए।
- संस्थागत पट्टे जारी करने की पारदर्शी और सरल प्रक्रिया शुरू की जाए।
वर्तमान में की जा रही सीलिंग कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और नए बायलॉज में व्यावहारिक संशोधन किए जाएं।
