Written by : Sanjay kumar
कोटा, 12 सितंबर। केशवपुरा चौराहा स्थित अन्नपूर्णा रसोई में शनिवार दोपहर करीब दो बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर बिना किसी पूर्व सूचना के वहां अचानक पहुंच गए। गरीब और जरूरतमंदों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने वाली इस सरकारी योजना की जमीनी हकीकत परखने के लिए मंत्री ने खुद आम नागरिकों की तरह वहां भोजन करने का फैसला किया। उन्होंने काउंटर से पर्ची कटवाई और निर्धारित राशि का भुगतान करके भोजन की गुणवत्ता का सीधा जायजा लिया।
थाली में मिली कमियां: जली रोटियां और खाली जगह
मंत्री द्वारा परोसी गई थाली की खुद जांच करने पर कई गंभीर व्यवस्थाएं सामने आईं। उन्हें जो रोटियां परोसी गईं, वे स्पष्ट रूप से जली हुई थीं। इसके साथ ही, केंद्र पर चावल पूरी तरह समाप्त हो चुके थे, जिसके कारण उनकी और अन्य आने वाले लोगों की थाली में चावल नहीं परोसा जा सका। इस स्थिति ने योजना के सुचारू संचालन और स्टॉक मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संचालन व्यवस्थाओं की खुली पोल
भोजन की गुणवत्ता के अलावा, रसोई प्रबंधन का ढीला रवैया भी निरीक्षण के दौरान उजागर हुआ। केंद्र पर भोजन परोसने के लिए कोई उचित या पर्याप्त स्टाफ नियुक्त नजर नहीं आया। लोग खुद ही अपनी थाली में खाना परोसने को मजबूर थे। इसके अतिरिक्त, टेबल पर छोड़ी गई जूटी प्लेटों को समय पर हटाने की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्वच्छता और प्रबंधन के दावों की पोल खुल गई।
नगर निगम आयुक्त को कड़े निर्देश
निरीक्षण के तुरंत बाद मंत्री मदन दिलावर ने कोटा नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा को फोन पर निर्देशित किया कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि योजना के तहत आम जनता को तय मापदंडों के अनुसार पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले। इस औचक कार्रवाई से स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित एजेंसी में हड़कंप मच गया है, और अब नगर निगम स्तर पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
