Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली, 13 सितम्बर। प्रगति मैदान स्थित अत्याधुनिक भारत मंडपम में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) आज अपने दूसरे और अंतिम दिन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस ऐतिहासिक दो दिवसीय महाकुंभ के समापन के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने स्वदेश के लिए दिल्ली से रवाना हो गए हैं। भारत की मेजबानी में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और नेतृत्व क्षमता को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक
इस शिखर सम्मेलन के दौरान सबसे बड़ा और कूटनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र रहने वाला पल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई आमने-सामने की मुलाकात रही। चीनी राष्ट्रपति के भारत आगमन के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट तक बेहद महत्वपूर्ण और खुली बातचीत हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने, आपसी विश्वास को फिर से बहाल करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शांति तथा स्थिरता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर पूरी सहमति जताई कि आपसी मतभेदों को किसी भी कीमत पर सीमा पर विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए और कूटनीतिक तथा सैन्य स्तर पर संवाद का सिलसिला लगातार जारी रहना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति के दौरे के प्रमुख राजनीतिक और कूटनीतिक मायने
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस दौरे और भारत के साथ हुई गहन चर्चा के बाद वैश्विक राजनीति में कई अहम बदलाव और संदेश देखने को मिले। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात को स्वीकारा कि विश्व की दो सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और पड़ोसी देशों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिरता न केवल दोनों राष्ट्रों के हित में है, बल्कि यह पूरे एशियाई क्षेत्र और वैश्विक आर्थिक विकास के लिए भी अनिवार्य है। इस मुलाकात के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापारिक संतुलन और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद बंध गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी खासा ध्यान खींचा है।
प्रधानमंत्री मोदी का समापन संबोधन और क्रिटिकल मिनरल्स पर कड़ा रुख
शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आ रही नई और गंभीर चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि कैसे आज के समय में तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) का रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो विकासशील देशों की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। प्रधानमंत्री ने तकनीकी के समावेशी उपयोग, निष्पक्ष आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर सर्वोपरि रखने की पुरजोर वकालत की।
भारत की अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभ और विजन
भारत की इस वर्ष की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ (Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability) के चार प्रमुख स्तंभों पर पूरी तरह केंद्रित रही। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ब्रिक्स अब केवल पारंपरिक सरकारों और मंत्रालयों तक सीमित रहने वाला मंच नहीं रह गया है, बल्कि इसमें जमीनी स्तर पर स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSME), किसानों, वैज्ञानिकों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित किया गया है ताकि जन-केंद्रित विकास को गति मिल सके।
चीन को औपचारिक रूप से सौंपी गई ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता
दो दिनों तक चले इस महासम्मेलन के अंतिम चरण में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक परंपरा के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समूह की आगामी अध्यक्षता औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक आयोजन को पूरी तरह सफल बनाने, आपसी आम सहमति बनाने और वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता दिखाने के लिए सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का हृदय से आभार व्यक्त किया और आगामी अध्यक्षता के लिए शुभकामनाएं दीं।
आतंकवाद के खिलाफ ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ की ऐतिहासिक मंजूरी
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी और कूटनीतिक रूप से निर्णायक उपलब्धि इसके पहले दिन ही हासिल हो गई थी, जब सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ को अपनी मंजूरी दी। इस घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया तथा 22 अप्रैल 2025 को हुए दर्दनाक पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इसमें आतंकवादियों, उनके वित्त पोषण करने वालों और उन्हें सुरक्षित पनाह देने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराए जाने पर जोर दिया गया है।
सांस्कृतिक गर्माहट, गाला डिनर और आपसी आत्मीयता
कूटनीतिक बैठकों और गंभीर भू-राजनीतिक मंथन के बीच, भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के सम्मान में एक भव्य गाला डिनर का आयोजन किया गया। इस रात्रिभोज में भारतीय संस्कृति, कला और लजीज व्यंजनों की अनूठी महक देखने को मिली। इस सांस्कृतिक संध्या का सबसे यादगार पल तब आया जब मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मंच पर लीजेंड गायक किशोर कुमार का लोकप्रिय गीत गाकर वहां मौजूद सभी वैश्विक नेताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और माहौल में एक अनोखी आत्मीयता घोल दी।
