Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 22 सितंबर। क्षेत्र में हृदय रोग शल्य चिकित्सा (Cardiac Surgery) के क्षेत्र में श्रीजी हॉस्पिटल और कोटा हार्ट हॉस्पिटल में अभूतपूर्व और विश्वस्तरीय सेवाओं का विस्तार हुआ है। नवनिर्मित श्रीजी अस्पताल परिसर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान हृदय शल्य चिकित्सा से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाओं और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश जिंदल ने बताया कि हाड़ौती क्षेत्र और संभवतः पूरे राजस्थान में पहली बार एक ही छत के नीचे 3 पूर्णतया आधुनिक, सुसज्जित और कार्यशील (Functioning) कार्डिएक ओटी (Cardiac OTs) उपलब्ध कराई गई हैं। इन अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटरों से न केवल अधिक संख्या में मरीजों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा, बल्कि शल्य चिकित्सा के दौरान मरीजों की सुरक्षा (Safety) का स्तर भी काफी बढ़ जाएगा।
बिना हड्डी काटे MICS सर्जरी से मिल रही त्वरित रिकवरी
अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. विक्रम गोयल ने बताया कि संस्थान में नियमित रूप से MICS (Minimally Invasive Cardiac Surgery) की जा रही है। अनुभवी मेडिकल टीम, अल्ट्रा-मॉडर्न इक्विपमेंट और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए मरीजों को इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ मिल रहा है।
डॉ. गोयल ने बताया कि MICS तकनीक दुनिया में लगभग 21 वर्षों से और भारत में करीब 20 वर्षों से इस्तेमाल की जा रही है। उन्होंने अपने 30 वर्षों के कार्डिएक सर्जरी के अनुभव को साझा करते हुए MICS सर्जरी के प्रमुख लाभ बताए:
हड्डी की कटाई नहीं (No Bone Cut): इसमें छाती की हड्डी काटने की आवश्यकता नहीं होती।
कोई वायरिंग नहीं (No Wiring): शरीर के भीतर कोई मेटल वायर नहीं छोड़ा जाता।
छोटा चीरा एवं अदृश्य निशान: सर्जरी के लिए बहुत छोटा चीरा लगाया जाता है, जिससे महिलाओं में ऑपरेशन का निशान लगभग अदृश्य रहता है।
कम दर्द और नाममात्र रक्तस्राव: पारंपरिक सर्जरी की तुलना में दर्द बहुत कम होता है और बलीडिंग नगण्य रहती है।
संक्रमण का शून्य खतरा: इस तकनीक से इंफेक्शन की संभावना लगभग 0% हो जाती है।
तेज रिकवरी: मरीज बहुत कम समय में ठीक होकर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।
सभी प्रकार के जटिल हृदय रोगों का सफल इलाज
प्रेस वार्ता में डॉ. विनीत चावला ने जानकारी दी कि केंद्र में हर प्रकार के जटिल हृदय एवं वक्ष रोगों के ऑपरेशन नियमित रूप से सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
बायपास सर्जरी (CABG)
वाल्व रिप्लेसमेंट एवं रिपेयर (Valve Replacement & Repair)
जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Defect)
एओर्टिक सर्जरी (Aortic Surgery)
पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज (PVD) एवं अन्य संबंधित रोग
डॉ. जिंदल ने अंत में दोहराया कि प्रबंधन हाड़ौती क्षेत्र में अल्ट्रा-मॉडर्न, परिष्कृत और कटिंग-एज तकनीक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि यह केंद्र न केवल स्थानीय मरीजों के लिए बल्कि देश-विदेश के रोगियों के लिए भी चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर (Milestone) साबित हो।
