Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 24 सितम्बर। राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनावों के तुरंत बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों की सरकार यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल और चुनावी पारा काफी चढ़ गया है। जिला मुख्यालयों पर आरक्षण प्रक्रिया की लॉटरी जारी होते ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार प्रदेश की विभिन्न पंचायत समितियों में कुल 221 महिला प्रधान अपनी जगह बनाएंगी, जिनमें जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख जिलों में महिला प्रधानों की संख्या सर्वाधिक रहने वाली है। प्रदेश भर की 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए चुनाव आयोजित किए जाएंगे, जबकि जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर को मिलाकर कुल 1.51 लाख से अधिक वार्डों में जन प्रतिनिधियों का चयन होगा। पंचायती राज अधिनियम के तहत महिलाओं को 50 प्रतिशत का वैधानिक आरक्षण प्राप्त होने के कारण इस संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से 75 हजार से भी अधिक महिलाएं विभिन्न स्तरों पर चुनकर सत्ता संभालेंगी। इनके अलावा 41 जिला प्रमुखों, 1 हजार 403 जिला परिषद सदस्यों, 457 प्रधानों और 8 हजार 245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों पर भी चुनाव होना है, जिसमें कुल मिलाकर 7 लाख से अधिक उम्मीदवारों के चुनावी मैदान में उतरने का अनुमान जताया ग
पंचायत समिति प्रधानों और जिला प्रमुख पदों का वर्गवार आरक्षण समीकरण
जिला स्तर पर बुधवार को संपन्न हुई लॉटरी प्रक्रिया के आधार पर 457 पंचायत समिति प्रधानों के पदों का सामाजिक वर्गवार विभाजन पूर्ण रूप से तय कर दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 79 पद, अनुसूचित जनजाति के लिए 93 पद तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए लगभग 56 पद आरक्षित किए गए हैं, जबकि शेष पदों पर सामान्य एवं महिला वर्ग का प्रतिनिधित्व रहेगा। इस बार के आरक्षण में कुछ विशेष क्षेत्रीय स्थितियां भी सामने आई हैं, जिनमें डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ जैसे 4 जिलों में केवल अनुसूचित जनजाति श्रेणी के ही प्रतिनिधि प्रधान पद पर आसीन हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त उदयपुर की 20 पंचायत समितियों में से किसी भी समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए प्रधान पद आरक्षित नहीं हुआ है, जबकि जयपुर की 22 पंचायत समितियों में से आधी यानी 11 समितियों में महिला प्रधान चुनी जाएंगी। जहाँ तक 41 जिलों के जिला प्रमुख पदों का सवाल है, उनका आरक्षण पूर्व में ही घोषित हो चुका है, जिसके तहत 8 पद अनुसूचित जाति, 7 पद अनुसूचित जनजाति और 5 पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा चूरू, अजमेर, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर, झालावाड़, फलोदी, बीकानेर तथा कोटा में जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला श्रेणी के लिए रखा गया है, वहीं जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, करौली, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, कोटपूतली-बहरोड़ एवं बारां में जिला प्रमुख सामान्य श्रेणी में होंगे, जहाँ आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधि भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे।
सरपंच एवं वार्ड पंच पदों हेतु उपखंड स्तरीय प्रक्रिया और ग्रामीण चौपालों में चुनावी सरगर्मी
जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समितियों के प्रधानों का आरक्षण खाका स्पष्ट होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। गुरुवार को उपखंड स्तर पर तहसील कार्यालयों में सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चूंकि ग्राम पंचायत स्तर पर पदों और प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक होती है, इसलिए इस अंतिम लॉटरी के साथ ही गांवों में चुनावी सरगर्मी चरम पर पहुंच जाएगी और गांवों की चौपालों पर सियासी गणित बैठने लगेगा। प्रादेशिक स्तर पर 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के डेढ़ लाख से अधिक वार्डों के समीकरण तय होते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दल और स्थानीय दावेदार अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर देंगे।
