राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में ‘थाउजेंड मिनिट्स ऑफ पीस’ पहल का शुभारंभ

Written by : प्रमुख संवाद

ध्यान और योग से संतुलित, सकारात्मक एवं ऊर्जावान विद्यार्थी जीवन की ओर कदम

कोटा, 24 जनवरी। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू), कोटा में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आंतरिक शांति एवं सकारात्मक सोच को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 24 जनवरी से 10 फरवरी तक आयोजित की जा रही पंद्रह दिवसीय प्रतिस्पर्धा ‘थाउजेंड मिनिट्स ऑफ पीस’ का औपचारिक शुभारंभ कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी द्वारा पोस्टर विमोचन के साथ किया गया।

विश्वविद्यालय के थॉट एंड इनोवेशन सेंटर के तत्वावधान में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को ध्यान, मेडिटेशन एवं योग के माध्यम से तनावमुक्त, एकाग्र और आत्मबल से परिपूर्ण बनाना है। प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिभागी विद्यार्थियों को निर्देशित (गाइडेड) मेडिटेशन कराया जाएगा, जिसमें ध्यान की कुल अवधि को रिकॉर्ड किया जाएगा। अधिकतम ध्यान मिनट्स पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रशंसा पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन, एकाग्रता और आत्मविश्वास को मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘थाउजेंड मिनिट्स ऑफ पीस’ विश्वविद्यालय परिसर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन कुछ समय ध्यान और आत्मचिंतन के लिए निकालने का आह्वान किया, जिससे अध्ययन और जीवन—दोनों में संतुलन स्थापित हो सके।

इस अवसर पर रिटायर्ड रियर एडमिरल श्री विनीत बक्शी (वीएसएम), थॉट एंड इनोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक डॉ. लता गिदवानी, डॉ. बी. डी. गिदवानी, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. एस. डी. पुरोहित, बीके प्रदीप, बीके विनोद सहित केंद्र के वॉलिंटियर्स एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

थॉट एंड इनोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक डॉ. लता गिदवानी ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि ध्यान और योग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रभावी माध्यम हैं। नियमित अभ्यास से तनाव हार्मोन में कमी आती है, मस्तिष्क शांत होता है तथा स्मरण शक्ति और मानसिक स्पष्टता में वृद्धि होती है। योग नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक है। इसके साथ ही यह शारीरिक स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार करता है।

जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुनील दत्त पुरोहित ने विद्यार्थियों को ध्यान एवं योग के व्यावहारिक लाभों से अवगत कराते हुए कहा कि नियमित अभ्यास से मानसिक थकान कम होती है, अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है और बेहतर नींद के कारण समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वहीं डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि ध्यान और योग से आत्म-जागरूकता का विकास होता है, जो विद्यार्थियों के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।

आरटीयू की यह पहल विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त, संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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