Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 14 मार्च। शास्त्रीय संगीत की मधुर लय, सुरों की गूंज और शब्दों में रची-बसी राष्ट्रभक्ति की भावधारा ने शनिवार को कोटा विश्वविद्यालय परिसर को देशप्रेम के रंग में रंग दिया। विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘शताब्दी स्वर–वंदे मातरम्’ कार्यक्रम में देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के हृदय में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।
विश्वविद्यालय परिसर स्थित फार्मेसी विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और देशभक्ति के ओजस्वी भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वर, लय और भावों की समन्वित प्रस्तुति ने वातावरण को राष्ट्रप्रेम के रस से सराबोर कर दिया।
डीन पीजी स्टडीज प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ संघ प्रचारक राजेन्द्र द्विवेदी रहे, जबकि अध्यक्षता कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने की।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित गौतम काले (इंदौर) एवं उनके समूह तथा डॉ. पामिल मोदी एवं उनके दल ने शास्त्रीय शैली में देशभक्ति गीतों की प्रभावी प्रस्तुति दी। सुरों की मधुरता और भावों की गहनता ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति के माध्यम से “वसुंधरा परिवार हमारा…”, “पूज्य मां की अर्चना का…”, “ले चले हम राष्ट्र नौका…”, “हम करें राष्ट्र आराधन…”, “मन समर्पित तन समर्पित…” जैसे गीतों ने राष्ट्रप्रेम, समर्पण और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के भाव को सजीव कर दिया। इन गीतों की प्रस्तुति में स्वर और भाव का ऐसा समन्वय था, जिसने श्रोताओं के मन में देशभक्ति के रस का संचार किया और वातावरण को आध्यात्मिक एवं राष्ट्रभाव से परिपूर्ण बना दिया।
मुख्य अतिथि राजेन्द्र द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में संघ के शताब्दी सफर का उल्लेख करते हुए राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की भावना पर बल दिया। कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवपूर्ण परंपरा, राष्ट्रभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष तथा संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इस प्रकार के आयोजन मातृभूमि को नमन करने के साथ ही युवा पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि स्वरांजलि के माध्यम से प्रस्तुत गीतों में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, उनके राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावनाओं को सुरों और शब्दों के माध्यम से सजीव किया गया। इस अवसर पर प्रो. रीना दाधीच, प्रो. एम.एल. साहू, प्रो. रंजन माहेश्वरी, प्रो. भवानी, प्रो. विजय सिंह, आयोजन समिति के सचिव संतोष कुमार मीणा, सह संयोजक डॉ. विक्रांत शर्मा, सरिता सौलंकी, डॉ. चमन तिवारी, संघ के सहकार्यवाहक श्याम नागर, बाबू लाल भाट, राधेश्याम वशिष्ठ, ओम त्रिपाठी, प्रमोद राठौड़, अरविंद सिसोदिया, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
