चंद्रेशल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: 4.33 करोड़ रुपये की लालच में वकील ने करवा दिया महंत का मर्डर

Written by : Sanjay kumar

कोटा, 11 जून 2026
कोटा शहर पुलिस ने जिला पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम (आईपीएस) के नेतृत्व में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बहुचर्चित चंद्रेशल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के ‘ब्लाइंड मर्डर’ का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के मुख्य साजिशकर्ता, जो कि मृतक महंत के विरोधी गुट का कथित कार्यकारी अध्यक्ष है, सहित दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में हत्या की वारदात को अंजाम देने वाला भाड़े का एक बदमाश भी शामिल है। पुलिस की विशेष टीमें वारदात में शामिल अन्य फरार बदमाशों की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं।

धारदार हथियारों से किया गया था हमला, अस्पताल में तोड़ा था दम

इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत 5 जून 2026 की रात को हुई थी। चंद्रेशल मठ के कोषाध्यक्ष बृजमोहन गुर्जर ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया था कि नंदनवन महाराज पिछले करीब 15 से 20 वर्षों से चंद्रेशल मठ में सेवा-पूजा कर रहे हैं। वहीं, देवानंद महाराज को मायापुरी निरंजनी अखाड़ा द्वारा मठ के प्रवचन, सत्संग और देखरेख के लिए मनोनीत कर भेजा गया था, जिन्हें यहां रहते हुए करीब 4-5 साल हो गए थे। 5 जून की रात लगभग 11 बजे मठ के पुराने महाराज नंदनवन का फोन आया कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने महंत देवानंद पर धारदार हथियारों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया है। मौके पर पहुंचने पर महंत लहूलुहान और बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें तुरंत इलाज के लिए एमबीएस अस्पताल कोटा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस पर पुलिस थाना बोरखेड़ा में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए किया गया था विशेष एसआईटी का गठन

एक प्रतिष्ठित संत की हत्या से जुड़े इस संवेदनशील मामले के कारण संत समाज में गहरा आक्रोश था और हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई थीं। जनभावनाओं और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुभाषचंद्र मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। इस पूरी कार्रवाई में एसआईटी, डीएसटी टीम, साइबर सेल और कोटा शहर के विभिन्न थानों (बोरखेड़ा, उद्योगनगर, विज्ञान नगर, रेलवे कॉलोनी, जवाहर नगर, कुन्हाड़ी व कोतवाली) के करीब 100 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को आरोपियों की तलाश और खुलासे के काम में लगाया गया था।

करोड़ों की जमीन और मठ के खातों पर कब्जा करना था मुख्य उद्देश्य

पुलिस जांच में सामने आया कि चंद्रेशल मठ करीब 1100 वर्ष पुराना एक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का केंद्र है, जिसके नाम पर लगभग 750 बीघा जमीन है। मठ के बैंक खातों में जमीन की आमदनी से प्राप्त करीब 4.33 करोड़ रुपये जमा हैं। इस अकूत संपत्ति और मठ के संचालन को हथियाने के लिए एक गहरा षड्यंत्र रचा गया था। दरअसल, महंत देवानंद महाराज द्वारा मठ की नई कार्यकारिणी का गठन कर उसे कानूनी रूप से मान्यता दिलाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसका पुरानी कार्यकारिणी के लोगों ने न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराकर विरोध किया। पुरानी कार्यकारिणी की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता संतोष राय ने स्वयं को पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया था। वह मठ की जमीन और खातों में जमा करोड़ों रुपयों को हड़पना चाहता था, लेकिन महंत देवानंद के बढ़ते प्रभाव और उनके धार्मिक आयोजनों के कारण उसके मंसूबों पर पानी फिर रहा था। इसी वजह से उसने महंत को अपने रास्ते से हटाने की साजिश रची।

अधिवक्ता ने एक लाख की सुपारी देकर बदमाशों से करवाई हत्या

मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय ने महंत की हत्या के लिए आदित्य वर्मा नाम के बदमाश को अपने साथ मिलाया, जिसका प्रेम विवाह खुद संतोष राय ने करवाया था। इस कारण आदित्य उस पर अंधा विश्वास करता था। संतोष राय ने आदित्य को हत्या के लिए 1 लाख रुपये की सुपारी दी। इसके बाद इस साजिश में अंकित बैरवा, पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस और एक अन्य साथी को भी शामिल किया गया। 1 जून 2026 को संतोष राय खुद आदित्य को लेकर मठ गया और वहां की भौगोलिक स्थिति तथा महंत की दिनचर्या की रेकी करवाई। खुद पर कोई शक न जाए, इसके लिए संतोष राय 2 जून को पैर की सर्जरी के बहाने जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती हो गया ताकि उसके पास ठोस बहाना (एलीबाय) रहे। योजना के अनुसार, 5 जून की रात को आदित्य वर्मा अपने साथियों के साथ दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर चाकू लेकर मठ पहुंचा और सोते हुए महंत देवानंद पर ताबड़तोड़ हमला कर उनकी निर्मम हत्या कर दी।

तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र से दबोचे गए हत्यारे

घटनास्थल के एकांत में होने और वहां दूर-दूर तक कोई सीसीटीवी कैमरा न होने के कारण यह ब्लाइंड मर्डर केस पुलिस के लिए एक बेहद कठिन चुनौती था। लेकिन गठित एसआईटी, साइबर सेल और डीएसटी टीम ने वैज्ञानिक तरीकों, मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मुख्य षड्यंत्रकर्ता संतोष कुमार राय (उम्र 52 वर्ष, निवासी गाजीपुर, उत्तर प्रदेश हाल निवासी जयपुर व कोटा) और हत्या में शामिल बदमाश पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस (उम्र 20 वर्ष, निवासी कोटा शहर) को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों से मामले में गहन अनुसंधान जारी है और वारदात में शामिल अन्य फरार आरोपियों (आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा व अन्य) की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।

Pramukh Samvad

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