Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली: 25 जुलाई 2026।
देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए अपने त्यागपत्र की घोषणा की और बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा माननीय प्रधानमंत्री को भेज दिया है।
NEET-UG परीक्षा पर त्वरित कार्रवाई और जिम्मेदारी स्वीकारना
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को भारत सरकार ने तुरंत गंभीरता से लिया था। सरकार द्वारा इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए गए, परीक्षा रद्द कर पुनः तिथि घोषित की गई, तथा भविष्य में इस परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र व राज्य सरकारों तथा जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सुचारू रूप से पुनः आयोजित की गई, जिसका परिणाम 16 जुलाई को घोषित हुआ।
इस्तीफे के प्रमुख कारण और आंतरिक विचार
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में इस्तीफे के निम्नलिखित मुख्य कारणों को रेखांकित किया:
- नैतिक जिम्मेदारी: उन्होंने कहा कि पहले ही दिन से उन्होंने इस पूरी परिस्थिति की नैतिक जिम्मेदारी ली और किसी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा।
- छात्र हित और भ्रम से सुरक्षा: पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से आहत होकर उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को भ्रम और राजनीति के चक्रव्यूह में फंसने से बचाना उनका मुख्य संकल्प है।
- राष्ट्र विरोधी ताकतों और कानूनी अड़चनों से बचाव: जंतर-मंतर तथा देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पन्न हुई स्थिति का कोई राष्ट्र विरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके और विद्यार्थियों का समय कानूनी पेचीदगियों में नष्ट न हो, इसलिए उन्होंने त्यागपत्र देने का निर्णय लिया।
विपक्ष पर निशाना और प्रधानमंत्री के प्रति आभार
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में दुख जताया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने और बाधा डालने का प्रयास किया गया। (उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी और विपक्षी दल लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे, जिस पर धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए कहा था कि छात्रों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।)
अंतिम संबोधन में उन्होंने विगत चार दशकों से शिक्षा सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आदरणीय प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद के साथियों तथा मंत्रालय के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से वे भविष्य में भी देश के युवाओं, ओडिशा की जनता और भारत माता की सेवा में समर्पित रहेंगे।
