Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 12 जून 2026
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने साइबर अपराधों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेशवासियों के लिए विशेष साइबर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर देश की नामी हस्तियों की नकली आवाज और वीडियो तैयार कर लोगों को निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार बना रहे हैं। फर्जी स्टॉक मार्केट निवेश ऐप्स, डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से राजस्थान के विभिन्न जिलों में लगातार ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं।
महानायक अमिताभ बच्चन की फर्जी आवाज का इस्तेमाल
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एडीजी) वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी इंटरनेट पर उपलब्ध प्रसिद्ध निवेशकों, बड़े उद्योगपतियों और सेलिब्रिटीज, विशेष रूप से अमिताभ बच्चन जैसे लोकप्रिय चेहरों के वीडियो एकत्रित करते हैं। इसके बाद एआई टूल्स की सहायता से उनकी आवाज और चेहरे के हाव-भाव को इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि वीडियो पूरी तरह वास्तविक प्रतीत होता है। इन वीडियो में दावा किया जाता है कि संबंधित हस्ती ने किसी विशेष ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या निवेश ऐप के माध्यम से कम समय में अपनी संपत्ति कई गुना बढ़ा ली है। लोगों का विश्वास जीतने के लिए इन वीडियो को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रसारित किया जाता है।
सोशल मीडिया विज्ञापनों से शुरू होता है खेल
पुलिस के अनुसार साइबर ठग सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन चलाते हैं। इन विज्ञापनों में लिखा होता है कि मात्र 10 हजार रुपये निवेश कर प्रतिदिन 5 हजार रुपये या उससे अधिक की कमाई की जा सकती है। कम समय में अधिक लाभ का लालच देकर लोगों को इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
फर्जी निवेश ग्रुपों में जोड़े जाते हैं लोग
जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसे विज्ञापन पर क्लिक करता है, उसे व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर बने तथाकथित “एलीट इन्वेस्टमेंट ग्रुप”, “सुपर ट्रेडिंग क्लब” या इसी प्रकार के अन्य आकर्षक नामों वाले समूहों में जोड़ दिया जाता है। ये ग्रुप देखने में अत्यंत पेशेवर और विश्वसनीय प्रतीत होते हैं, जिससे लोगों को संदेह नहीं होता।
बॉट्स और नकली स्क्रीनशॉट से जीता जाता है भरोसा
इन समूहों में शामिल अधिकांश सदस्य वास्तविक नहीं होते। साइबर अपराधियों द्वारा संचालित फर्जी अकाउंट और ऑटोमेटेड बॉट्स लगातार लाखों रुपये के कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा करते रहते हैं। कई बार नकली बैंक स्टेटमेंट, लाभ के चार्ट और धन्यवाद संदेश भी पोस्ट किए जाते हैं, जिससे नए जुड़े व्यक्ति को यह विश्वास हो जाता है कि लोग वास्तव में भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया जाता है
जब अपराधियों को लगता है कि व्यक्ति पूरी तरह प्रभावित हो चुका है, तब उसे एक लिंक या एपीके फाइल भेजी जाती है और एक विशेष ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यह ऐप आमतौर पर गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होता। इसके बावजूद लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यह एक विशेष और अत्यधिक लाभ देने वाला निवेश प्लेटफॉर्म है।
शुरुआत में दिखाया जाता है फर्जी मुनाफा
पीड़ित जब इस ऐप में 10 हजार, 20 हजार या उससे अधिक राशि जमा करता है तो ऐप के भीतर उसका मुनाफा तेजी से बढ़ता हुआ दिखाया जाता है। कुछ ही दिनों में निवेश राशि कई गुना दिखाई देने लगती है। यह देखकर व्यक्ति उत्साहित हो जाता है और अपनी बचत, एफडी, पारिवारिक जमा-पूंजी तथा कई मामलों में ऋण लेकर भी बड़ी रकम निवेश कर देता है। जबकि वास्तविकता में यह केवल सॉफ्टवेयर द्वारा दिखाया गया भ्रम होता है और पैसा सीधे अपराधियों तक पहुंच चुका होता है।
पैसे निकालने पर शुरू होती है असली ठगी
ठगी का असली खेल तब शुरू होता है जब निवेशक अपनी कथित कमाई को बैंक खाते में निकालने का प्रयास करता है। विड्रॉल प्रक्रिया के दौरान उसे बताया जाता है कि राशि निकालने से पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, कमीशन या अन्य प्रशासनिक शुल्क जमा कराना होगा। कई बार पीड़ित से बार-बार अलग-अलग कारण बताकर अतिरिक्त राशि जमा करवाई जाती है। इसके बावजूद पैसा नहीं मिलता और अंततः अपराधी मोबाइल नंबर बंद कर देते हैं, ग्रुप डिलीट कर देते हैं तथा पूरी रकम लेकर फरार हो जाते हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार और युवा बन रहे निशाना
राजस्थान पुलिस के अनुसार इस प्रकार की ठगी में विशेष रूप से मध्यमवर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। जल्दी अमीर बनने की चाहत और निवेश की सीमित जानकारी का फायदा उठाकर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
राजस्थान पुलिस ने जारी किए छह महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे किसी भी वित्तीय या ट्रेडिंग ऐप को केवल अधिकृत ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। किसी भी व्हाट्सएप लिंक, टेलीग्राम संदेश या अनजान वेबसाइट से प्राप्त एपीके फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल न करें। निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी, ब्रोकर या प्लेटफॉर्म का भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकरण अवश्य जांचें। किसी भी अनजान व्यक्ति या अज्ञात बैंक खाते में सीधे धनराशि ट्रांसफर न करें। व्हाट्सएप और टेलीग्राम की प्राइवेसी सेटिंग्स को सुरक्षित रखें तथा ग्रुप इनविटेशन सेटिंग को “एवरीवन” से बदलकर “माय कॉन्टैक्ट्स” पर सेट करें। यदि किसी सेलिब्रिटी या उद्योगपति का वीडियो निवेश की सलाह देता हुआ दिखाई दे तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। साथ ही यह हमेशा याद रखें कि कोई भी वैध निवेश योजना बिना जोखिम के कुछ दिनों में दोगुना या तीन गुना रिटर्न नहीं देती।
एडीजी वीके सिंह ने दी विशेष सलाह
एडीजी वीके सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब लोगों के मनोविज्ञान पर हमला कर रहे हैं। प्रसिद्ध चेहरों और विश्वसनीय दिखने वाले वीडियो के माध्यम से लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पूरी जांच करना आवश्यक है।
ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना शिकायत दर्ज करानी चाहिए। पुलिस के अनुसार शुरुआती कुछ घंटे, जिन्हें गोल्डन ऑवर्स कहा जाता है, धनराशि को होल्ड या रिकवर कराने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। पीड़ित को तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए ताकि संबंधित बैंकों से संपर्क कर लेनदेन को फ्रीज कराने का प्रयास किया जा सके।
राजस्थान पुलिस ने जारी किए हेल्पडेस्क नंबर
राजस्थान पुलिस ने राज्य के नागरिकों को साइबर आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष हेल्पडेस्क नंबर भी जारी किए हैं। नागरिक 9256001930 तथा 9257510100 पर संपर्क कर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक निवेश प्रस्तावों, फर्जी सेलिब्रिटी वीडियो और असामान्य मुनाफे के दावों से सावधान रहें। साइबर अपराधी तकनीक के साथ लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत ही साइबर ठगी के विरुद्ध सबसे प्रभावी हथियार है।
