Written by : Sanjay kumar
नई दिल्ली:27 जुलाई 2026
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली व पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग और कथित रूप से पेलेट गन (छर्रे) चलाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना में कई छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने के साक्ष्य सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज़ दबाने का आरोप लगाते हुए संसद से लेकर सड़कों तक विरोध तेज़ कर दिया है।
घायल छात्र और मेडिकल रिपोर्ट के साक्ष्य
20 जुलाई को आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान कई युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में चल रहा है:
- साहिल लोचब (19 वर्ष): नजफगढ़ निवासी और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल को चेहरे और आंख के पास गंभीर चोटें आई हैं। एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज जारी है, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी आँख की रोशनी जाने की आशंका जताई है।
- शेख इरशाद मंसूरी: चेहरे और गर्दन पर छर्रे लगने के बाद लेडी हार्डिंग अस्पताल में उनका उपचार किया गया।
- मेडिकल साक्ष्य: एम्स और लेडी हार्डिंग अस्पताल के डॉक्टरों व एमएलसी (MLC) रिकॉर्ड में घायलों के शरीर से धातु के छोटे छर्रे (Pellets) निकालने की बात दर्ज है, जो सुरक्षा बलों के दावों पर सवाल खड़े करती है।
विपक्ष का रुख और माँगें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि अपने अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षाओं की माँग कर रहे निर्दोष युवाओं पर दमनकारी कार्रवाई लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।
विपक्ष और छात्र संगठनों की मुख्य माँगें:
- उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच: पूरे प्रकरण और पेलेट गन के इस्तेमाल के दावों की अदालत की देखरेख में या किसी स्वतंत्र एजेंसी से त्वरित जाँच कराई जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आदेश देने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
- निःशुल्क इलाज व मुआवज़ा: घायल छात्रों का पूरा चिकित्सीय खर्च सरकार उठाए और उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाए।
प्रशासन और पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयानों में पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों का खंडन किया है। हालाँकि, प्रदर्शन स्थल पर तैनात दंगारोधी बलों की भूमिका और अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट में सामने आए अंतर को देखते हुए इस मामले में पारदर्शी जाँच की माँग लगातार बढ़ रही है।
निष्कर्ष
लोकतंत्र में देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्रों की माँगों को संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए। दमनकारी रवैये के बजाय सरकार को तुरंत पारदर्शी जाँच के आदेश देकर दोषियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और छात्रों को न्याय दिलाना चाहिए।
