Written by : लेखराज शर्मा
बारां / देवरी:28 जुलाई
क्या आपने कभी ऐसे स्कूल के बारे में सुना है जहाँ न कोई घंटी बजाने वाला बच्चा है, न किसी की कॉपी चेक करनी है और न ही प्रार्थना में ‘जन-गण-मन’ गाने वाली कोई बाल-मंडली है, फिर भी स्कूल का ताला रोज खुलता है और दो-दो शिक्षक पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं? शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली का यह अनोखा और हैरान कर देने वाला नज़ारा बारां जिले के शाहबाद ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत बीलखेड़ा माल के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रायपुर में देखने को मिल रहा है।
बिना बच्चों का ‘हाई-टेक’ सन्नाटा
सरकारी खजाने से लाखों रुपये का भवन बना है, ब्लैकबोर्ड तैयार है और दो-दो शिक्षक भी तैनात हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए छात्रों की संख्या शून्य है! जी हाँ, इस पूरे स्कूल में एक भी बच्चा नामांकित नहीं है। शिक्षक महोदय सुबह नियम से आते हैं, दिनभर खाली कुर्सियों और दीवारों को निहारते हैं, और समय पूरा होते ही स्कूल में ताला लगाकर चले जाते हैं। बिना किसी मशक्कत के हर महीने खाते में मोटी सैलरी क्रेडिट हो रही है।
आखिर कहाँ गायब हो गए सारे बच्चे?
गांव के स्थानीय निवासी हरिओम मेहता का कहना है कि रायपुर गांव में अब केवल 5-6 परिवार ही बचे हैं। गाँव में कोई छोटा बच्चा है ही नहीं, और जो बड़े बच्चे हैं वे पास के देवरी कस्बे के प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं।
- पिछले सत्र का गणित: पिछले साल यहाँ कुल 3 बच्चे थे।
- एक बच्चा 5वीं पास करके चला गया,
- दूसरे ने टीसी (TC) कटवा ली,
- और तीसरा परिवार के साथ गाँव से पलायन कर गया।
- इस सत्र का नतीजा: नामांकन का आंकड़ा सीधा जीरो (0) पर आकर टिक गया!
अधिकारियों तक बात पहुँची, पर फाइल अब भी अटकी!
आश्चर्य की बात यह है कि जब गाँव में बच्चे ही नहीं थे, तो स्कूल को दूसरे पास के स्कूल में मर्ज (विलय) करने की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की गई? - प्रधानाध्यापक ब्रजमोहन मेहता का कहना है कि उन्होंने शून्य नामांकन की लिखित जानकारी पीईओ (PEO) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दे दी है।
- वहीं, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (शाहाबाद) रहीम उद्दीन का कहना है कि मामले की जानकारी लेकर स्कूल को बंद करने या आगे की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कागजों में चल रहे इस ‘बिना बच्चों वाले अनोखे स्कूल’ और सरकारी संसाधनों की हो रही बर्बादी पर विभाग कितनी जल्दी ताला लगाता है!
