श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में श्रद्धा से मनाया गया ‘कचौरी पूनम’ पर्व, प्रभु को धराया उड़द दाल कचौरी का महाभोग

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 29 जुलाई:
पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रथम पीठ, पाटनपोल स्थित श्री बड़े मथुराधीश जी मंदिर में बुधवार को व्यास (गुरु) पूर्णिमा का पावन उत्सव अपार भक्तिभाव और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। प्रथम पीठ के युवराज गोस्वामी मिलन बावा के सांनिध्य व निर्देशन में आयोजित इस धार्मिक उत्सव में तड़के से ही प्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं और वैष्णव जन का सैलाब उमड़ पड़ा।
हल्दी की देहरी और वंदनवार से महका प्रांगण
पर्व की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए पुष्टिमार्गीय सेवा प्रणालियों का निष्ठापूर्वक पालन किया गया। उत्सव की शुरुआत में मंदिर के मुख्य द्वारों की देहरी का शुद्ध हल्दी से लेपन किया गया। इसके बाद आशापाल के पत्तों और सूत की डोरियों से निर्मित भव्य वंदनवार से प्रवेश द्वारों को सुसज्जित किया गया।
‘पूनम कचौरी’ का विशेष महाभोग
गोस्वामी मिलन बावा ने बताया कि पुष्टिमार्ग में गुरु पूर्णिमा का अपना एक विशिष्ट स्थान है। इस दिन प्रभु को सामान्य मूंग दाल के बजाय विशेष रूप से उड़द दाल की पीठी से बनी कचौरी का भोग अर्पित करने की परंपरा है। इसी दिव्य परंपरा के कारण वैष्णव समाज में इस तिथि को ‘कचौरी पूनम’ के नाम से भी जाना जाता है। प्रभु श्री मथुराधीश जी को यह विशेष ‘पूनम कचौरी’ आरोगाई गई।
जयकारों और ‘श्री कृष्णः शरणं मम’ से गुंजायमान हुआ मंदिर
दिनभर मंदिर परिसर “श्री कृष्णः शरणं मम” के दिव्य जाप और प्रभु के जयकारों से गुंजायमान रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पुष्टिमार्ग में गुरु पूजन का विधान
इस अवसर पर गोस्वामी मिलन बावा ने संप्रदाय की अनूठी परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु पूर्णिमा पर प्रभु सेवा का विशेष उत्सव मनाया जाता है, लेकिन वल्लभ संप्रदाय में गुरुदेव का मुख्य पूजन श्रावण शुक्ल द्वादशी (पवित्रा एकादशी के अगले दिन) को करने का विधान है। उसी पावन तिथि पर गुरु चरणों में रेशमी सूत के धागों से निर्मित ‘पवित्रा’ और विशेष सेवा समर्पित की जाती है।

Pramukh Samvad

ताजा खबरों को देखने के लिए प्रमुख संवाद से जुड़े

https://www.pramukhsamvad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!