Written by : Sanjay kumar
जोधपुर, 30 जनवरी। राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में हुई अचानक और रहस्यमयी मौत ने प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में सनसनी फैला दी है। मात्र 25 वर्ष की आयु में साध्वी की असामयिक मृत्यु को लेकर लगातार नए सवाल सामने आ रहे हैं। मौत से ठीक पहले लगाया गया इंजेक्शन, छह महीने पुराना वायरल वीडियो और मृत्यु के कई घंटे बाद सोशल मीडिया पर सामने आया कथित सुसाइड नोट—इन तीन कड़ियों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा पिछले दो दिनों से अस्वस्थ थीं। बुधवार शाम आश्रम में ही एक कंपाउंडर को बुलाकर उन्हें इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन के कुछ ही समय बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और उन्हें नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद आश्रम, श्रद्धालुओं और संत समाज में शोक के साथ-साथ आक्रोश भी देखा गया।
तीन बिंदुओं में उलझी मौत की गुत्थी
1. मौत के बाद सामने आया कथित सुसाइड नोट
साध्वी प्रेम बाईसा के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक भावनात्मक पोस्ट सामने आई, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म, संत समाज और स्वयं के संघर्षों का उल्लेख किया है। हैरानी की बात यह है कि यह पोस्ट उनकी मृत्यु के लगभग तीन घंटे बाद प्रकाशित हुई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह पोस्ट पहले से शेड्यूल थी या फिर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनके सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की गई। पुलिस अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश कर रही है।
2. छह महीने पुराना वायरल वीडियो
जुलाई 2025 में साध्वी प्रेम बाईसा का एक निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने उनके व्यक्तिगत जीवन और आश्रम की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस मामले में साध्वी ने स्पष्ट किया था कि वीडियो को साजिश के तहत लीक किया गया और इसके पीछे ब्लैकमेलिंग की कोशिश थी। उन्होंने इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। माना जा रहा है कि यह विवाद उनकी मानसिक स्थिति पर लंबे समय से असर डाल रहा था।
3. मौत से ठीक पहले लगाया गया इंजेक्शन
सबसे बड़ा सवाल उस इंजेक्शन को लेकर है, जो उनकी मौत से कुछ देर पहले लगाया गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इंजेक्शन में कौन-सी दवा दी गई, क्या वह किसी पंजीकृत डॉक्टर की सलाह पर थी, और क्या किसी तरह की लापरवाही या साजिश इसमें शामिल थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक थी, दवा की प्रतिक्रिया से हुई या फिर किसी जहरीले पदार्थ के कारण।
जांच के दायरे में कई पहलू
बोरानाडा थाना पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच को कई कोणों से आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस ने आश्रम के कर्मचारियों, कंपाउंडर, चिकित्सकों और साध्वी के करीबी लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही, उनके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कॉल डिटेल्स की तकनीकी जांच भी की जा रही है।
संत समाज और श्रद्धालुओं की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी प्रकार की साजिश है तो दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
सवाल अब भी कायम
क्या साध्वी प्रेम बाईसा की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय हादसा थी?
क्या यह मानसिक दबाव और बदनामी के चलते उठाया गया कोई आत्मघाती कदम था?
या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश छिपी है?
इन तमाम सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिका हैं। फिलहाल, साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत ने समाज, संत समुदाय और प्रशासन—तीनों को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
