महर्षि गौतम प्राकट्य उत्सव : निकली भव्य शोभायात्रा, डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने दिया सनातन संस्कृति को मजबूत करने का संदेश

Written by : Sanjay kumar

कोटा, 15 मार्च 2026।
महर्षि गौतम प्राकट्य उत्सव के अवसर पर रविवार को कोटा में गौतम समाज दादाबाड़ी के तत्वावधान में भव्य और आकर्षक शोभायात्रा का आयोजन किया गया। श्रद्धा, आस्था और उत्साह से परिपूर्ण इस शोभायात्रा में हजारों समाजबंधुओं ने भाग लेकर महर्षि गौतम के जयकारों से पूरे मार्ग को गुंजायमान कर दिया। शोभायात्रा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक कल्पना देवी, संदीप शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन के साथ कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। शोभायात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें धार्मिक झांकियों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

इस अवसर पर श्री रामलला अयोध्याधाम सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने समाजबंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि गौतम का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को सत्य, संयम, अनुशासन और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला प्रेरणास्रोत भी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को महर्षि गौतम के आदर्शों को अपनाने की अत्यंत आवश्यकता है।

डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने अपने संदेश में आचरण और प्रयासों से सनातन संस्कृति को और अधिक सशक्त, गौरवशाली और विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के लिए समाज को कहा। उन्होंने बताया कि सनातन संस्कृति केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलाने वाली महान जीवन पद्धति है। हमें अपने आचरण, संस्कार और विचारों से इसकी गरिमा को और मजबूत बनाना होगा। महर्षि गौतम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार, समाज में सद्भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सनातन की असली पहचान है। जब हम अपनी संस्कृति, भाषा, पर्व-त्योहार और आध्यात्मिक मूल्यों को गर्व से अपनाते हैं, तभी सनातन की जड़ें और गहरी होती हैं।

आचार्य राजानंद नेआग्रह किया कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब हम दिखावे और आडंबर से दूर रहकर सादगी, संस्कार और सामाजिक समरसता को जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च और प्रतिस्पर्धा को समाज के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि सादगीपूर्ण विवाह समाज की आर्थिक और नैतिक मजबूती का आधार बन सकते हैं। उन्होंने गौतम समाज द्वारा शादियों में सीमित व्यंजन रखने के संकल्प को सराहनीय पहल बताते हुए इसे समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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तीन बत्ती सर्किल बसंत विहार से प्रारंभ हुई लगभग दो किलोमीटर लंबी शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई दादाबाड़ी छोटे चौराहे से गुजरते हुए गोदावरी धाम के सामने हनुमंत वाटिका पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में आकर्षक झांकियों, लोकनृत्य और भक्तिमय प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और उत्सवमय बना दिया।

यात्रा में सबसे आगे लहराते भगवा ध्वज श्रद्धा और सनातन संस्कृति की गौरवपूर्ण पहचान प्रस्तुत कर रहे थे। कच्ची घोड़ी नृत्य करते कलाकारों ने लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक पेश की। घोड़े पर सवार झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और वीर छत्रपति शिवाजी की झांकियों ने वीरता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

इसके साथ ही महाकाल के भजनों पर नृत्य करती युवाओं की टोली, डीजे पर गूंजते भक्ति गीतों पर झूमते श्रद्धालु तथा बग्गी पर विराजमान महर्षि गौतम की आकर्षक झांकी शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। भगवान शिव की झांकी, गरुड़ पर विराजमान भगवान विष्णु, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण, माता लक्ष्मी तथा सप्तऋषि मंडल की झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

शोभायात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मंच बनाकर पुष्प वर्षा से स्वागत किया। भगवा ध्वजों से सजे मार्ग और भक्ति गीतों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया।

कार्यक्रम के संरक्षक जगमोहन गौतम एवं संभागीय संयोजक संजय गौतम ने बताया कि शोभायात्रा का शुभारंभ ध्वज पूजन और महर्षि गौतम की प्रतिमा के पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजक अजय चतुर्वेदी ने कहा कि इस आयोजन ने समाज में धार्मिक चेतना के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया है।

कार्यक्रम के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संकल्प लेते हुए घोषणा की कि विवाह समारोहों में यदि 11 से अधिक व्यंजन बनाए जाएंगे तो समाजबंधु ऐसे कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे। इस निर्णय का उद्देश्य समाज में बढ़ते दिखावे और कर्ज लेकर किए जाने वाले अनावश्यक खर्च को रोकना है।

शोभायात्रा का समापन हनुमंत वाटिका में हुआ, जहां 108 दीपों से भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अतिथियों का सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और काव्य पाठ भी आयोजित किया गया। साथ ही चंबल माता की आरती कर चंबल नदी के शुद्धिकरण का सामूहिक संकल्प लिया गया।

इस भव्य आयोजन में समाज के अनेक पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें महंत श्री श्री 1008 बाल किशन जी महाराज, कथावाचक पं. रवि गौतम, नारायणलाल पंचारिया, समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यप्रकाश जोशी, महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष माया त्रिवेदी, युवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जोशी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विशाल शर्मा के साथ कुंज बिहारी गौतम, हीरेंद्र शर्मा, अनिल गौतम, श्याम बिहारी शर्मा, रमेश गौतम, कांग्रेस कोटा महिला अध्यक्ष शालिनी गौतम सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।

महर्षि गौतम प्राकट्य उत्सव की यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और सादगीपूर्ण जीवन के संदेश के साथ समाज को नई दिशा देने का माध्यम भी बनी।


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