Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 10 फरवरी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने औद्योगिक क्षेत्रों में अनियंत्रित भूजल दोहन को गंभीर पर्यावरणीय संकट मानते हुए राजस्थान के 17 जिलों के जिला कलेक्टरों को नोटिस जारी किया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भूजल संरक्षण केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव दिखना आवश्यक है।
एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के दिशा-निर्देशों की अवहेलना पर गहरी नाराजगी जताते हुए सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने की स्थिति में उन्हें 19 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनजीटी के समक्ष उपस्थित होना होगा।
औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन करोड़ों लीटर भूजल का उपयोग
अधिकरण के संज्ञान में आया है कि राजस्थान के विभिन्न रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों ट्यूबवेल के माध्यम से प्रतिदिन भारी मात्रा में भूजल का दोहन किया जा रहा है। यह जल न केवल औद्योगिक गतिविधियों में, बल्कि श्रमिकों और कर्मचारियों की घरेलू आवश्यकताओं के लिए भी उपयोग में लिया जा रहा है, जबकि इसके लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति भूजल आपूर्ति सुप्रीम कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है और इससे पर्यावरणीय संतुलन को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
‘कागजों की कार्रवाई नहीं, ज़मीनी परिणाम चाहिए’
सुनवाई के दौरान अधिकरण ने विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल रिपोर्ट और फाइलों में कार्य दर्शाना पर्याप्त नहीं है। भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और वैकल्पिक जल स्रोतों के उपयोग जैसे उपाय वास्तविक रूप से लागू होने चाहिए, विशेषकर अति-दोहन और संकटग्रस्त क्षेत्रों में।
राजस्व और पर्यावरण—दोनों को भारी नुकसान
प्रकरण में यह भी सामने आया कि पूर्व वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों में भूजल उपयोग के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमतियाँ नहीं ली गईं, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई। इसी मामले में पूर्व में रीको पर आर्थिक दंड भी लगाया जा चुका है। एनजीटी ने संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में भी नियमों की अनदेखी हुई, तो जिम्मेदारी तय करते हुए व्यक्तिगत स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
जल सुरक्षा को लेकर राज्यों को निर्देश
अधिकरण ने राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों को भी निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और औद्योगिक जल प्रबंधन को लेकर ठोस, समयबद्ध और मापनीय कार्ययोजना प्रस्तुत करें। विशेष रूप से वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रित जल के उपयोग और अवैध ट्यूबवेल को बंद करने जैसे कदमों पर जोर दिया गया है।
इन जिलों के कलेक्टरों से मांगा गया जवाब
राजस्थान के अलवर, बीकानेर, बाड़मेर, सीकर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चूरू, सिरोही, श्रीगंगानगर, जालोर, झुंझुनूं, कोटा, जयपुर, पाली, सवाई माधोपुर, करौली और राजसमंद जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत शपथ-पत्र दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
