H-1B वीज़ा पर संकट की आहट: अमेरिकी सांसद ने ‘EXILE Act’ पेश किया, भारतीय प्रोफेशनल्स में बढ़ी चिंता

Written by : Sanjay kumar

वाशिंगटन/नई दिल्ली, 11 फरवरी 2026।
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के लिए सबसे लोकप्रिय कार्य वीज़ा माने जाने वाले H-1B प्रोग्राम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक कदम सामने आया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूब ने ‘EXILE Act’ नामक विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य H-1B वीज़ा कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। यह प्रस्ताव अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देने और कंपनियों द्वारा कथित दुरुपयोग को रोकने के तर्क के साथ लाया गया है।


विधेयक का उद्देश्य और प्रावधान

प्रस्तावित ‘EXILE Act’ के तहत इमिग्रेशन कानून में संशोधन कर वित्तीय वर्ष 2027 के बाद H-1B वीज़ा की नई स्वीकृतियों को शून्य करने का प्रावधान किया गया है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो अमेरिका में विशेषज्ञ श्रेणी के विदेशी पेशेवरों के लिए मौजूदा H-1B ढांचा समाप्त हो जाएगा।

सांसद स्ट्यूब का कहना है कि कुछ कंपनियों ने इस प्रणाली का उपयोग अमेरिकी नागरिकों की बजाय कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए किया, जिससे घरेलू रोजगार अवसर प्रभावित हुए। उनके अनुसार, यह कदम अमेरिकी युवाओं और कामगारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।


H-1B वीज़ा का महत्व

H-1B वीज़ा अमेरिका में तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्त और शोध जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है।
हर वर्ष 85,000 H-1B वीज़ा जारी किए जाते हैं (65,000 सामान्य कोटा और 20,000 अमेरिकी उच्च डिग्री धारकों के लिए अतिरिक्त कोटा)।

भारतीय नागरिक इस वीज़ा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में जारी किए गए H-1B वीज़ा का लगभग 70 प्रतिशत या उससे अधिक भारतीय पेशेवरों को मिला है, विशेषकर आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में कार्यरत कर्मचारियों को।


भारतीय पेशेवरों पर संभावित प्रभाव

यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं:

  • अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों के अवसर सीमित हो सकते हैं।
  • ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े कई आवेदकों की दीर्घकालिक योजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
  • भारतीय आईटी कंपनियों की ऑन-साइट तैनाती रणनीतियों में बदलाव आ सकता है।
  • वैकल्पिक वीज़ा श्रेणियों जैसे L-1, O-1 या अन्य रोजगार आधारित श्रेणियों पर निर्भरता बढ़ सकती है।

पूर्व प्रतिबंध और बढ़ती सख्ती

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रशासन ने कानूनी और अवैध दोनों प्रकार के इमिग्रेशन पर निगरानी बढ़ाई है। H-1B वीज़ा के दुरुपयोग को लेकर नियमों को सख्त करने, वेतन मानकों को बढ़ाने और अतिरिक्त शुल्क लगाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। इन परिवर्तनों ने पहले से ही विदेशी पेशेवरों और नियोक्ताओं के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रखा है।


राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

H-1B वीज़ा लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में बहस का विषय रहा है।

  • समर्थकों का तर्क है कि यह कार्यक्रम अमेरिका को वैश्विक प्रतिभा से जोड़ता है और नवाचार को गति देता है।
  • विरोधियों का कहना है कि इससे स्थानीय श्रमिकों के अवसर प्रभावित होते हैं।

‘EXILE Act’ इसी बहस का ताज़ा अध्याय है। हालांकि किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों की मंजूरी आवश्यक होती है, इसलिए अंतिम निर्णय में समय लग सकता है।


निष्कर्ष

H-1B वीज़ा को समाप्त करने का प्रस्ताव फिलहाल प्रारंभिक विधायी चरण में है, लेकिन इसकी घोषणा ने भारतीय पेशेवरों और वैश्विक आईटी उद्योग में व्यापक चिंता पैदा कर दी है। आने वाले महीनों में अमेरिकी संसद में इस पर होने वाली चर्चा और राजनीतिक समर्थन-विरोध की स्थिति यह तय करेगी कि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है या नहीं।

फिलहाल, भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए यह समय परिस्थितियों पर करीबी नज़र रखने और संभावित वैकल्पिक विकल्पों पर रणनीतिक विचार करने का है।

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