Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 19 फरवरी ।
राज्य में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों से ठीक पहले सरकार एक ऐसा फैसला लेने की तैयारी में है, जो चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। प्रत्याशियों की पात्रता से जुड़ी बच्चों की संख्या वाली शर्त को समाप्त करने का प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया गया है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो उम्मीदवारों के लिए बच्चों की संख्या कोई बाधा नहीं रहेगी।
प्रस्ताव में संकेत दिया गया है कि अब तक चर्चा में रही ‘तीन बच्चों तक छूट’ की सीमा से भी आगे बढ़ते हुए सभी प्रकार की संख्या संबंधी पाबंदियां हटाई जा सकती हैं। इस कदम को व्यापक सामाजिक संतुलन और अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अगले पंद्रह दिन अहम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अगले एक पखवाड़े में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। अंतिम निर्णय के बाद नगर पालिका कानून में संशोधन आवश्यक होगा, जिसके लिए विधायी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विभागीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है ताकि समय पर आवश्यक बदलाव लागू किए जा सकें।
विधेयक या अध्यादेश से रास्ता साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार चाहे तो मौजूदा विधानसभा सत्र में संशोधन विधेयक ला सकती है। आवश्यकता पड़ने पर अध्यादेश के जरिए भी बदलाव लागू किया जा सकता है, जिससे चुनाव कार्यक्रम प्रभावित न हो।
क्या है वर्तमान नियम?
अभी लागू नियमों के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते। यह प्रावधान जनसंख्या नियंत्रण नीति के तहत लागू किया गया था। हालांकि, लंबे समय से विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा इसमें बदलाव की मांग की जा रही थी।
मंत्री ने क्या कहा?
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों के आधार पर प्रस्ताव विधि विभाग को भेजा गया है। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक समावेशी और समान अवसर देने वाला बनाना है। अंतिम निर्णय विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह फैसला न केवल निकाय चुनावों की दिशा तय करेगा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नया संदेश देगा।
