Written by : Sanjay kumar
बूंदी,19 फरवरी।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) ने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में क्लोजर में रखे गए रीवाइल्ड बाघ तथा मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व की बाघिन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के बाद रामगढ़ में पिछले एक वर्ष से सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रहे बाघ को खुले जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना प्रबल हो गई है।
उल्लेखनीय है कि उक्त युवा बाघ को 4 दिसंबर 2024 को अभेड़ा बायलॉजिकल पार्क, कोटा से रीवाइल्डिंग कार्यक्रम के तहत रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया था। तब से उसे सॉफ्ट एनक्लोजर में रखकर उसके व्यवहार, शिकार क्षमता और अनुकूलन प्रक्रिया की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। रिजर्व प्रबंधन के अनुसार बाघ ने अब तक 60 से अधिक शिकार किए हैं, जो उसकी प्राकृतिक प्रवृत्ति और शिकार कौशल की पुष्टि करता है।
एनटीसीए द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व की क्लोजर में बंद बाघिन को पाँच हेक्टेयर से बड़े क्लोजर में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उसके प्राकृतिक व्यवहार को और बेहतर ढंग से विकसित किया जा सके। वहीं रामगढ़ में क्लोजर में रखे बाघ के व्यवहार, विशेषकर आक्रामक प्रवृत्ति और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं का आकलन कर अंतिम निर्णय मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा लिया जाएगा। इस संबंध में उनका स्थल निरीक्षण भी प्रस्तावित है।
वर्तमान में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में आरवीटी-1 नामक बाघ का वर्चस्व है, जो पहले एक युवा बाघ को मार चुका है। इसके अतिरिक्त यहाँ पाँच बाघिन भी मौजूद हैं। ऐसे परिदृश्य में नए बाघ की रिहाई को लेकर वन विभाग सतर्क रुख अपनाए हुए है, ताकि क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना को न्यूनतम रखा जा सके और पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
वन विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक मूल्यांकन और व्यवहारिक विश्लेषण के आधार पर लिया गया निर्णय न केवल बाघ संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह रीवाइल्डिंग कार्यक्रम की सफलता के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि सभी मानदंड संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आने वाले समय में यह बाघ खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करता नजर आ सकता है।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में यह पहल प्रदेश में बाघ संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा दे सकती है और भविष्य में अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है।
