किराया बकाया प्रकरण में सख्त कार्रवाई, ₹14.20 लाख की वसूली न होने पर न्यायालय ने एक माह का सिविल कारावास सुनाया

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 18 फरवरी 2026। किराया बकाया से जुड़े एक लंबे समय से लंबित वाद में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रतिवादी अनुराग फतेहपुरिया को ₹14,20,000 की राशि अदा न करने की स्थिति में एक माह के सिविल कारावास का आदेश दिया है। यह आदेश सुरभि झामनानी बनाम अनुराग फतेहपुरिया प्रकरण (इजराइ वाद संख्या 9/14) में पारित किया गया।

प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2009 में अनुराग फतेहपुरिया ने संबंधित दुकान खाली कर उसका कब्जा सुरभि झामनानी को सौंप दिया था। हालांकि, दुकान खाली करने के बावजूद बकाया किराया राशि का भुगतान नहीं किया गया। वाद वर्ष 2014 से न्यायालय में विचाराधीन था। लंबी सुनवाई और आदेशों के बावजूद राशि का भुगतान न होने पर वसूली की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

न्यायालय के समक्ष यह तथ्य प्रस्तुत किया गया कि बकाया किराया राशि ₹14,20,000 का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। आदेशानुसार, यदि उक्त राशि की अदायगी नहीं होती है, तो प्रतिवादी को एक माह के सिविल कारावास में रखा जाएगा, ताकि इस अवधि के दौरान भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह कारावास दंडात्मक न होकर वसूली सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

मामले में अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बोरखेड़ा थाना पुलिस ने अनुराग फतेहपुरिया को गिरफ्तार कर किराया अधिनियम न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें एक माह के सिविल कारावास हेतु भेजा गया। अधिवक्ता के अनुसार, यदि निर्धारित अवधि में भी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय से कारावास अवधि बढ़ाने हेतु विधिक कार्यवाही की जाएगी।

न्यायालय के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि वसूली कार्यवाही फरियादी के खर्चे पर संपादित की गई। आदेश की प्रति के अनुसार, कुल ₹14,20,000 की वसूली शेष है और भुगतान न होने की दशा में सिविल कारावास प्रभावी रहेगा।

यह मामला दर्शाता है कि न्यायालय किराया बकाया जैसे मामलों में भी गंभीरता से संज्ञान लेते हुए वसूली सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठा सकता है। लंबे समय से लंबित इस वाद में पारित आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने पर विधिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

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