Written by : Sanjay kumar
नयी दिल्ली, 19 फरवरी 2026: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज राज्यों द्वारा वितरित मुफ्त योजनाओं (Freebies) पर स्पष्ट और कड़े शब्दों में गहन टिप्पणी और आलोचना की है। अदालत ने कहा है कि इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य केवल संसाधनों का वितरण नहीं हो सकता, बल्कि ऐसी योजनाओं की आवश्यकता है जो लोगों के जीवन स्तर में दीर्घकालिक सुधार लाएँ और रोजगार सृजन तथा आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करें।
मुख्य बिंदु और न्यायालय की टिप्पणियाँ
- मुफ्त योजनाओं की “Freebie Culture” पर चिंता:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं, फिर भी मुफ्त बिजली, मुफ्त भोजन, मुफ्त साइकिल जैसे वितरण कर रहे हैं। इस तरह की अनियोजित, सार्वत्रिक “Freebies” संस्कृति आर्थिक विकास को बाधित कर सकती है और जनता के बीच कार्य संस्कार को कमजोर कर सकती है। - लक्ष्य निर्धारण की आवश्यकता:
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य कमजोर और आर्थिक रूप से असमर्थ नागरिकों की मदद करना चाहते हैं, तो यह एक वैध कल्याणकारी कदम है। लेकिन बिना विभेद किये सभी को मुफ्त लाभ देना न्यायालय के अनुसार एक आकर्षक चुनावी नीति बन सकता है जो सतत विकास को प्रभावित करता है। - रोजगार सृजन पर जोर:
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्यों को महत्वपूर्ण व संवहनीय योजनाएं बनानी चाहिए जो रोजगार के अवसर पैदा करें — जैसे बेरोजगारी भत्ता कार्यक्रम और कौशल विकास पहलें — और जनता की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। - राजकोषीय अनुशासन और बजट पारदर्शिता:
न्यायालय ने यह भी कहा कि यह न्यायिक रूप से एक संपूर्ण समस्या है न कि केवल किसी एक राज्य की। अदालत ने पूछा कि राज्य अपने बजट में मुफ्त सुविधाओं के लिए पहले से वित्तीय योजना क्यों नहीं पेश करते, और किसने यह सिद्ध किया कि यह राजकोषीय वितरण स्थिर और सम्भव है।
संदर्भ और कानूनी प्रक्रिया
न्यायालय यह टिप्पणी तामिलनाडु पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉर्पोरेशन लि. के उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रहा था, जिसमें अनिर्धारित रूप से सभी उपभोक्ताओं के लिये मुफ्त बिजली लागू करने का प्रस्ताव था। न्यायालय ने केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है ताकि वे इस नीति का वैधानिक और आर्थिक आधार स्पष्ट करें।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि:
- मुफ्त वितरण को मात्र एक राजनीतिक उपकरण की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
- सरकारों को दीर्घकालिक नीति, रोजगार विकास, और आर्थिक मजबूती पर जोर देना चाहिए।
- यह टिप्पणी केवल व्यापक “freebie culture” पर नहीं है, बल्कि देश के सर्वहित में आर्थिक और सामाजिक संतुलन पर आधारित है।
