Written by : Sanjay kumar
सीकर, 5 मई।
सीकर शहर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर ठगों ने एक बुजुर्ग चार्टर्ड अकाउंटेंट को निशाना बनाया। करीब 24 दिनों तक लगातार मानसिक दबाव बनाकर आरोपियों ने उससे 1.03 करोड़ रुपए की बड़ी रकम ठग ली। यह मामला जिले में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी घटनाओं में गिना जा रहा है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बनाया बंधक
पीड़ित 72 वर्षीय हनुमान सिंह, जो नवलगढ़ रोड क्षेत्र में अकेले रहते हैं, को ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा। शुरुआत में अनजान कॉल्स को नजरअंदाज करने के बावजूद, बाद में व्हाट्सएप कॉल के जरिए उन्हें लगातार धमकाया गया। आरोपियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे किसी गंभीर साइबर अपराध में फंस चुके हैं।
अश्लील मैसेज और अवैध ट्रांजैक्शन का आरोप
ठगों ने पीड़ित पर महिलाओं को आपत्तिजनक संदेश भेजने और बैंक खातों से गैरकानूनी लेनदेन करने का आरोप लगाया। इन आरोपों से घबराकर पीड़ित मानसिक रूप से टूटने लगे। 4 अप्रैल से 27 अप्रैल के बीच उन्हें लगातार निगरानी में रखकर भय का माहौल बनाया गया।
वर्दी में वीडियो कॉल, फर्जी जांच का ड्रामा
आरोपियों ने खुद को केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बताकर वर्दी में वीडियो कॉल किए। उन्होंने नकली ऑफिस और फर्जी दस्तावेज दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश की। यहां तक कि एक बनावटी एफआईआर दिखाकर कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाने का दबाव बनाया गया।
15 बार ट्रांसफर, परिवार से उधार तक लिया
डर के माहौल में पीड़ित ने अपनी जमा पूंजी के साथ-साथ अपने बेटे और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए। करीब 35 लाख रुपए उधार लेकर अलग-अलग खातों में आरटीजीएस के माध्यम से कुल 15 से अधिक बार रकम भेजी गई। इस तरह कुल 1.03 करोड़ रुपए ठगों के हाथ लग गए।
पुलिस जांच में जुटी, नंबरों के आधार पर तलाश
मामले की जानकारी मिलने के बाद साइबर पुलिस सक्रिय हो गई है। जांच अधिकारी आरपीएस जीवनलाल खत्री के अनुसार, जिन मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल किए गए, उनके आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
सावधानी ही सुरक्षा: ऐसे बचें ‘डिजिटल अरेस्ट’ से
यह मामला एक गंभीर चेतावनी है कि कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं चलाती। आमजन को चाहिए कि इस तरह की धमकियों से घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
