Written by : Sanjay kumar
कोटा : 05 मई 2026
तकनीकी शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय ने शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, व्यवहारिक और कौशल-आधारित बनाने के उद्देश्य से नई शैक्षणिक संरचना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में पारंपरिक शिक्षा पद्धति पर्याप्त नहीं है, इसलिए अब शिक्षा को आधुनिक, नवाचार-आधारित और रोजगार उन्मुख बनाना आवश्यक है।


‘फेल’ प्रणाली समाप्त, क्रेडिट आधारित मूल्यांकन लागू
नई शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत पारंपरिक ‘फेल’ प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह क्रेडिट आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू की जा रही है। इस प्रणाली में विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन उनके द्वारा अर्जित किए गए क्रेडिट्स के आधार पर किया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी किसी विषय में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता है, तो वह उस विषय को दोबारा पढ़कर अपने क्रेडिट्स सुधार सकता है, जिससे उसका एक वर्ष या पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद नहीं होगा। इस परिवर्तन से विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव कम होगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
मल्टीपल एंट्री-एग्जिट और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC)
विश्वविद्यालय ने मल्टीपल एंट्री और एग्जिट प्रणाली को लागू करते हुए ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) व्यवस्था को भी अपनाया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों के सभी अर्जित क्रेडिट्स डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें ट्रांसफर भी किया जा सकेगा। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई को बीच में रोक सकते हैं और बाद में पुनः शुरू कर सकते हैं। इससे शिक्षा अधिक लचीली बनेगी और विद्यार्थियों को निरंतरता बनाए रखने में आसानी होगी।
विषय चयन की स्वतंत्रता और इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा
नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। अब वे एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विभिन्न विषयों का संयोजन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय द्वारा कॉमन पूल, ओपन इलेक्टिव और स्किल बेस्ड कोर्सेज को शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी विषयों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों का ज्ञान भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनकी सोच व्यापक होगी और वे बहुआयामी क्षमता विकसित कर पाएंगे।
डिजिटल, ऑनलाइन और ब्लेंडेड लर्निंग को बढ़ावा
नई प्रणाली में डिजिटल शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। विद्यार्थियों को 40 प्रतिशत तक क्रेडिट ऑनलाइन माध्यम से अर्जित करने की सुविधा दी जाएगी। इसके अंतर्गत ऑनलाइन कोर्स, वर्चुअल लैब, डिजिटल कंटेंट और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण शामिल हैं। इससे विद्यार्थी देश-विदेश के उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों से जुड़ सकेंगे और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।
कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर विशेष जोर
विश्वविद्यालय ने तकनीकी शिक्षा को पूरी तरह से कौशल आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, इंडस्ट्री ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करेंगे और सीधे रोजगार या स्वरोजगार के लिए सक्षम बनेंगे।
विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु ‘आनंदम केंद्र’ और मूल्य आधारित शिक्षा
नई शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विश्वविद्यालय में ‘आनंदम केंद्र’ की स्थापना की जा रही है, जहां ध्यान, योग, जीवन मूल्य और मानसिक संतुलन पर आधारित गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी मजबूत बनाना है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली और नवाचार को बढ़ावा
विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करते हुए ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ के अंतर्गत विशेष केंद्र स्थापित करेगा। यहां विद्यार्थियों को भारतीय विज्ञान, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित किया जाएगा।
नई फैकल्टी के साथ मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा का विस्तार
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में पहली बार 8 नई फैकल्टी का गठन किया गया है, जिससे शिक्षा का स्वरूप अधिक व्यापक और बहुआयामी बन गया है।
Faculty of Built Environment के माध्यम से विद्यार्थियों को शहरी विकास, निर्माण प्रबंधन और सतत इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का ज्ञान दिया जाएगा।
Faculty of Materials Science and Engineering में नए मटेरियल, नैनो टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल मटेरियल्स के अध्ययन पर फोकस किया जाएगा, जिससे उद्योगों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञ मिल सकें।
Faculty of Mechanical and Applied Engineering पारंपरिक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के साथ आधुनिक एप्लाइड टेक्नोलॉजी को जोड़ते हुए विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री रेडी बनाएगी।
Faculty of Computer Science and Communication Engineering में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Faculty of Energy and Environment के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं, जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हैं।
Faculty of Management Studies विद्यार्थियों को प्रबंधन, उद्यमिता और नेतृत्व कौशल प्रदान करेगी, जिससे वे उद्योग और स्टार्टअप दोनों क्षेत्रों में सफल हो सकें।
Faculty of Arts के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक विज्ञान, मानविकी और रचनात्मक विषयों से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी सोच और अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत होगी।
Faculty of Science में बुनियादी विज्ञान (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स आदि) को मजबूत आधार के रूप में विकसित किया जाएगा, जो तकनीकी शिक्षा की नींव को सुदृढ़ बनाता है।
इन सभी फैकल्टी के माध्यम से विश्वविद्यालय ने मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा मॉडल को मजबूती दी है, जिससे विद्यार्थी एक ही समय में विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
राजस्थान को तकनीकी शिक्षा का अग्रणी केंद्र बनाने का लक्ष्य
विश्वविद्यालय का उद्देश्य राजस्थान को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास का अग्रणी केंद्र बनाना है। इस नई शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकेंगे। यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कुलगुरु का दृष्टिकोण और संदेश
कुलगुरु प्रो. निमित्त चौधरी ने कहा कि यह परिवर्तन केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस नई व्यवस्था के माध्यम से विद्यार्थी अधिक आत्मनिर्भर, कुशल और नवाचारी बनेंगे तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
शिक्षा से रोजगार तक एक मजबूत सेतु
इस नई शिक्षा प्रणाली के लागू होने से तकनीकी शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। अब शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और अवसर प्रदान करेगी। इससे वे न केवल अपने करियर में सफल होंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
