Written by : प्रमुख संवाद
कोटा/जयपुर, 9 मई। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक और चिकित्सकीय एक्शन लिया है। प्रारंभिक जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग ने यूटीबी पर कार्यरत लेडी डॉक्टर डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया है, जबकि सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार सहित दो नर्सिंग कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग और राज्य सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। चिकित्सा आयुक्त बीएल गोयल ने शुक्रवार को कोटा पहुंचकर संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल एवं मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. निलेश जैन के साथ करीब तीन घंटे तक अस्पताल में विस्तृत जांच की। इस दौरान ऑपरेशन थियेटर, पोस्ट गायनिक वार्ड, उपचार प्रक्रिया, दवाइयों के रिकॉर्ड और ड्यूटी चार्ट की गहन पड़ताल की गई। आयुक्त ने भर्ती प्रसूताओं और उनके परिजनों से भी सीधे बातचीत कर फीडबैक लिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पोस्ट गायनिक वार्ड में वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं थी और उपचार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से रेजिडेंट डॉक्टरों के भरोसे चल रही थी। ऑपरेशन के बाद मरीजों की मॉनिटरिंग और चिकित्सकीय प्रबंधन में गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए चिकित्साकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
चिकित्सा निदेशालय ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरजीत कौर और नर्सिंग कर्मी निमेश वर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं वार्ड प्रभारी प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार तथा डॉ. नेहा सिहरा को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई थी। इनमें दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि अन्य का इलाज जारी है। मामले ने प्रदेशभर में चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम कोटा भेजी थी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपचार में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। पूरे घटनाक्रम के बाद चिकित्सा विभाग ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूता वार्डों की मॉनिटरिंग और पोस्ट ऑपरेटिव केयर व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।
