Written by : प्रमुख संवाद
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला प्रतिनिधिमंडल, प्रीमियम टेक्सटाइल विकास की दिशा में पहल
कोटा, 17 मई। राजस्थान की पारंपरिक वस्त्र कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध एरी सिल्क के समन्वय से एक नया प्रीमियम फैब्रिक विकसित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में रविवार को कोटा स्थित लोकसभा कैंप कार्यालय में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव, फैशन डिजाइनरों एवं बुनकरों के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर इस अभिनव पहल पर विस्तार से चर्चा की।
दो सांस्कृतिक विरासतों का होगा रचनात्मक मेल
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा डोरिया हाड़ौती क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय बुनकरों की वर्षों की मेहनत का जीवंत प्रतीक है। इसे पूर्वोत्तर के एरी सिल्क के साथ जोड़ने से दो अलग-अलग क्षेत्रों की समृद्ध हस्तकरघा परंपराएं एक मंच पर आएंगी और देश के कारीगरों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘5F विजन’ — फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैब्रिक, फैब्रिक टू फैशन और फैशन टू फॉरेन — को मजबूत आधार प्रदान करेगी और भारतीय टेक्सटाइल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
कारीगरों और बुनकरों को मिलेंगे नए अवसर
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस प्रस्तावित फैब्रिक फ्यूजन से राजस्थान और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकरों को रोजगार एवं बाजार के नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलने की संभावना है। कोटा के फैशन डिजाइनरों ने भी इस नए प्रयोग को लेकर अपने सुझाव और डिजाइन संभावनाएं साझा कीं।
कैथून में देखा कोटा डोरिया का पारंपरिक स्वरूप
इससे पूर्व केंद्रीय सचिव संजय जाजू ने कैथून स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का निरीक्षण किया। इस दौरान जिला कलक्टर पीयूष समारिया तथा नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NEHHDC) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कोटा डोरिया की पारंपरिक बुनाई प्रक्रिया को करीब से देखा और एरी सिल्क के साथ उसके संयोजन की संभावनाओं पर चर्चा की।
हल्केपन और मजबूती का होगा नया मेल
संजय जाजू ने बताया कि प्रस्तावित विशेष फैब्रिक में एरी सिल्क की मुलायम बनावट और कोटा डोरिया की हल्की एवं पारदर्शी बुनावट का संयोजन किया जाएगा। इसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि एरी सिल्क अपनी मजबूती, गर्माहट और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के लिए जाना जाता है, जबकि कोटा डोरिया अपनी विशिष्ट चौकड़ीदार बनावट और हल्केपन के कारण विश्वभर में पहचान रखता है। दोनों का यह समन्वय भारतीय हस्तकरघा क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
जल्द होगा समझौता, प्रशिक्षण और बाजार पर रहेगा फोकस
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NEHHDC) और जिला उद्योग केंद्र (DIC) के बीच जल्द ही एमओयू किए जाने की तैयारी है। इसके तहत संयुक्त डिजाइन विकास, कारीगर प्रशिक्षण और उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
